कनॉट प्लेस में प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कारोबारियों ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली: दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारी समझदारी से काम लेंगे और आम लोगों को परेशानी नहीं होगी। वहीं, कनॉट प्लेस के व्यापारियों ने त्योहारों के मौसम में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP के प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारी सद्बुद्धि से काम लेंगे। इस मामले में कारोबारियों की चिंता भी सामने आई है, क्योंकि कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है और त्योहारों के दौरान यहां ग्राहकों की आवाजाही महत्वपूर्ण रहती है।

दिल्ली पुलिस ने नहीं दी प्रदर्शन की अनुमति

CJP ने शुक्रवार शाम कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित करने की घोषणा की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी और लोगों से वहां एकत्र होने से बचने की अपील की।

पुलिस के मुताबिक, सीमित संख्या में लोगों को किसी उपयुक्त स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की सुविधा दी जा सकती है। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 भी लागू की गई है।

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क आम लोगों के लिए बंद रखने की घोषणा की।

कारोबार प्रभावित होने की आशंका

कनॉट प्लेस के व्यापारियों के संगठन, न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA), ने राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे विरोध-प्रदर्शन के लिए किसी अन्य स्थान का चयन करें। संगठन का कहना है कि प्रदर्शन के कारण बाजार में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

व्यापारी संगठन ने प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हुए कहा कि कनॉट प्लेस उनका कार्यस्थल है और यहां होने वाले प्रदर्शनों से रोजमर्रा के कारोबार पर असर पड़ सकता है।

प्रदर्शन की घोषणा के बाद बढ़ा विवाद

रिपोर्ट के अनुसार, CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पहुंचने के बाद गिरफ्तार किया गया था और एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद CJP की ओर से कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च आयोजित करने की घोषणा की गई।

फिलहाल, इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर विवाद बना हुआ है।