संयुक्त राष्ट्र के आपराधिक न्याय तंत्र में समयबद्ध बदलाव की भारत ने की वकालत

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न्यूयॉर्क : भारत ने संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय तंत्र में व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत की ओर से बोलते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों के अवशिष्ट तंत्र (IRMCT) के कामकाज को उसके निर्धारित दायित्वों के अनुरूप पूरा किया जाना चाहिए। साथ ही, इस प्रक्रिया में न्यायिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

मनीष तिवारी ने तंत्र की अध्यक्ष न्यायाधीश ग्रासिएला गात्ती सांताना के नेतृत्व में हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए कहा कि संस्थान के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध योजना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के प्रशासनिक या संस्थागत बदलाव के दौरान न्यायिक प्रक्रिया और कानून के शासन से जुड़े सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।

भारत ने विशेष रूप से पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं को सहायता देने तथा न्यायाधिकरणों के अभिलेखों के संरक्षण और प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को जारी रखने पर बल दिया। भारत का मानना है कि ये जिम्मेदारियां अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरणों की विरासत को सुरक्षित रखने और अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय को जिम्मेदारी सौंपने पर जोर

भारत ने कहा कि भविष्य में यदि तंत्र की कुछ जिम्मेदारियां संयुक्त राष्ट्र सचिवालय को हस्तांतरित की जाती हैं, तो इस प्रक्रिया में कानूनी स्पष्टता, जवाबदेही और संस्थागत निरंतरता का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही, बदलाव के वित्तीय और प्रशासनिक प्रभावों का भी उचित आकलन जरूरी है।

IRMCT का गठन पूर्व यूगोस्लाविया और रवांडा से संबंधित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों के शेष न्यायिक कार्यों को जारी रखने के लिए किया गया था। इसके दायित्वों में सजा के क्रियान्वयन की निगरानी, गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं को सहयोग और महत्वपूर्ण न्यायिक अभिलेखों का संरक्षण शामिल है।

नाइजर में रह रहे लोगों की स्थिति पर चिंता

भारत ने उन लोगों की स्थिति पर भी चिंता जताई, जिन्हें न्यायाधिकरण से बरी होने या रिहा किए जाने के बाद नाइजर में स्थानांतरित किया गया था। मनीष तिवारी ने 21 नवंबर 2025 के एक न्यायिक आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 दिसंबर 2026 के बाद इन व्यक्तियों को आगे वित्तीय सहायता देने का तंत्र का कानूनी या न्यायिक दायित्व नहीं रहेगा।

उन्होंने संबंधित पक्षों से सहयोग के आधार पर स्थायी समाधान निकालने की अपील की, ताकि प्रभावित व्यक्तियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जा सके।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से भी अपील की कि वे तंत्र के शेष कार्यों को समय पर पूरा करने में रचनात्मक सहयोग दें। भारत के अनुसार, संस्थागत बदलाव की पूरी प्रक्रिया न्याय, निष्पक्षता और कानून के शासन के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।