डेस्क : भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि दुनिया में कहीं भी युद्ध होता है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। ऐसे हालात में अंतरराष्ट्रीय समुदाय मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता। उन्होंने संघर्षों का समाधान निकालने के लिए बातचीत और कूटनीति को आवश्यक बताया।
जयशंकर ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध का प्रभाव केवल संघर्ष वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूर-दराज के देशों की अर्थव्यवस्थाओं और आम लोगों को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चिंता
विदेश मंत्री ने दुनिया में जारी दो प्रमुख संघर्षों—रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष—का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से उन समाजों और अर्थव्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है, जिनकी इन युद्धों में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
जयशंकर के मुताबिक, भारत का रुख स्पष्ट है कि युद्ध और विवादों का स्थायी समाधान संवाद तथा कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत शांति बहाली के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है और इस दिशा में दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने को भी तैयार है।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी उठाए सवाल
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय संकटों के बीच वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और साझा समस्याओं का समाधान निकालने के उद्देश्य से हुई थी। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने में प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, दुनिया के बड़े हिस्से को अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने की आवश्यकता है।
आतंकवाद को बताया शांति के लिए गंभीर खतरा
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद शांति के लिए गंभीर खतरा है और किसी देश की नीतियों या उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में इसका इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जयशंकर ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट प्रयास करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हितों के कारण आतंकवाद के प्रति नरम रुख नहीं अपनाया जाना चाहिए।
युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी
जयशंकर ने शांति और आर्थिक विकास के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि आज दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक बाजारों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और साझा संसाधनों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में किसी एक क्षेत्र में संघर्ष होने से दूसरे देशों में भी आर्थिक अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
उन्होंने दोहराया कि भारत संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने के लिए केवल चिंता जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि देशों को मिलकर ठोस प्रयास करने होंगे।









