बांग्लादेश में रोजाना 5,000 से 7,000 गिरफ्तारियों का दावा, शेख हसीना ने उठाए सवाल

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डेस्क : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश की मौजूदा सरकार पर बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करने, छापेमारी और तलाशी अभियान चलाने तथा हिरासत में लोगों को प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को दबाने और उनकी पार्टी अवामी लीग को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

अवामी लीग के सोशल मीडिया मंच पर जारी बयान में हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था, नागरिक अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर गोपालगंज में सुरक्षा एजेंसियां व्यापक स्तर पर छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही हैं।

रोजाना 5,000 से 7,000 गिरफ्तारियों का दावा

शेख हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश में प्रतिदिन 5,000 से 7,000 लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक दमन बताते हुए कहा कि नागरिकों को उनके मौलिक अधिकार और कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। हालांकि, गिरफ्तारियों की इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है।

हसीना ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अवामी लीग को राजनीतिक गतिविधियों से बाहर करने के प्रयास कर रही है। उन्होंने सरकार के चुनावी जनादेश पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए कानूनी कार्रवाई का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आर्थिक संकट को लेकर भी सरकार पर निशाना

पूर्व प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने गैस, बिजली, ईंधन और उर्वरकों की कमी, महंगाई, बेरोजगारी में वृद्धि तथा मिलों और कारखानों के बंद होने का दावा किया। उनके अनुसार, निवेश में सुस्ती और बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

2024 के आंदोलन के बाद भारत में रह रही हैं हसीना

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं।

नवंबर 2025 में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में उनकी भूमिका को लेकर उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। हसीना ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

बांग्लादेश सरकार उनकी प्रत्यर्पण की मांग भी कर चुकी है। भारत ने इस अनुरोध को स्वीकार किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है।