KGMU धर्मांतरण की जांच PGI पहुंची, व्हाट्सऐप पर चलती थी लव जिहाद की पाठशाला

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में लवजिहाद और धर्मांतरण की पाठशाला व्हाट्सऐप ग्रुप पर चलती थी। यहां मिलने के बहाने आगरा, देवबंद, बरेली और कई अन्य स्थलों से मौलानाओं को हॉस्टल में बुलाया जाता था। वे तरकीर पढ़ते थे। इसके बाद मुस्लिम डॉक्टरों, जेआर और मेडिकल स्टाफ के साथ मिलकर लवजिहाद, धर्मांतरण के लिए योजना बनती थी। वहीं, केजीएमयू से मामले की जांच अब पीजीआई भी पहुंच गई है।

डॉक्टर, मौलाना और मेडिकल स्टॉफ के लोग व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़े गए थे। उसी ग्रुप पर आदेश-निर्देश भी दिए जाते थे। एसटीएफ की तफ्तीश में और पीड़ितों के बयानों में इन बिंदुओं की पुष्टि हुई है। धर्मांतरण के आरोप में जेल में बंद डॉ. रमीज ने ग्रुप में आगरा एसएनएमसी कॉलेज से पढ़े मुनेश खान, मोहम्मद कैफ, डॉक्टर सैम अनीस, केजीएमयू के मोहम्मद जहीर, मोहम्मद अमान, मो. अयान व अन्य दोस्त भी जोड़े थे। इसके अलावा ग्रुप में केजीएमयू की डॉक्टर सुमायरा कयूम, इस्लामिक विचारधारा के कट्टरपंथी डॉ. वाहिद अली, एसएस अब्बास व अन्य लोग भी थे।

इस ग्रुप पर कैसे हिंदू महिला डॉक्टरों को परेशान करना है? उनके साथ कैसा बर्ताव करना है? छुट्टी पास करनी है अथवा नहीं? इन बिंदुओं पर भी चर्चा होती थी। अगर किसी मुस्लिम डॉक्टर अथवा मेडिकल स्टाफ के साथ कोई समस्या होती अथवा वह किसी आरोप में फंसता तो उसे कैसे बचाना है? इन बिंदुओं पर भी आदेश निर्देश दिए जाते थे।

फेसटाइम और व्हाट्सऐप पर होती थी बात

केजीएमयू, आगरा एसएनएमसी के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के लोग आपस में पहले जहां मैनुअल कॉल पर घंटों बातचीत करते थे, वहीं धर्मांतरण का खेल उजागर न हो और कॉल ट्रेस न हो इस डर से डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ फेसटाइम (आईफोन से आईफोन) अथवा व्हाट्सऐप कॉल पर बात करते थे। धर्मांतरण के रैकेट का खुलासा होने के बाद भी इन ग्रुपों से जुड़े लोग फेसटाइम पर ही बात कर रहे हैं। गिरोह से जुड़े लोग पुलिस और जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। एसटीएफ ने कई लोगों को चिह्नित भी कर लिया है। गिरोह से जुड़े लोगों के संबंध में एजेंसियां साक्ष्य संकलन कर रही हैं।

ग्रुप छोड़कर तमाम हुए अंडरग्राउंड

केजीएमयू, आगरा, बस्ती समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर और कर्मचारी इस्लामिक मेडिकोज अथवा आरोपी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के अन्य व्हाट्सएप ग्रुप जुड़े थे वह अब छोड़ने लगे हैं। लोगों ने उसमें कमेंट और पोस्ट बंद कर दिया है। डॉक्टर रमीज समेत एसटीएफ द्वारा आरोपी बनाए गए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से जुड़े 12 लोग भी एक-दूसरे से दूरी बनाने लगे हैं। प्रकरण के पहले रेजिडेंट जहां महिला स्टाफ से घंटों बातचीत कर उनके साथ खान-पान करता था, अब उनके ईदगिर्द तक नहीं भटक रहा है। कोशिश भी यह करता है कि उनके समय में उसकी ड्यूटी ही न लगे। हालांकि जांच एजेसियों ने रमीज के करीबियों का डाटा जुटा लिया है। कॉल डिटेल्स के आधार पर उनसे जल्द ही पूछताछ करेगी। जरूरत पड़ने पर उनके मोबाइल जब्त कर टीमें डेटा भी रिकवरी कराया जाएगा।

डार्क वेब से चलता था लवजिहाद का नेटवर्क

जांच में पता चला है कि धर्मांतरण का आरोपी रमीज डार्क वेब के जरिए पूरे देश में फैले अपने लोगों से जुड़ा था। सिर्फ चैटिंग नहीं, रोज टास्क था। कैसे महिलाओं को भरोसे में लेना है? कैसे जाल में फंसाना है? हर दिन फंसाने का नया पैंतरा बताता था। एसटीएफ ने उसका लैपटॉप कब्जे में लिया है। डिजिटल कुंडली खंगाली जा रही है। लैपटॉप खुलेगा तो नेटवर्क के कई चेहरे बेनकाब होंगे। दिसंबर 2025 में महिला डॉक्टर की शिकायत के बाद केस एसटीएफ को सौंपा गया था।

पीजीआई कनेक्शन की भी जांच

एसटीएफ अब केजीएमयू के एसजीपीजीआई कनेक्शन की जांच भी शुरू कर रही है। एसजीपीजीआई के हिंदू मेडिकल स्टाफ और जेआर के बयान दर्ज किए जाएंगे। बयानों के आधार पर जो भी वहां डॉक्टर अथवा स्टाफ दोषी मिला उसके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाएगी। एसटीएफ ने कई मेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों को रडार पर ले लिया है। उनकी निगरानी की जा रही है।