डेस्क : तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार को पुलिस ने करीब नौ घंटे बाद जमानत पर रिहा कर दिया। अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर कथित द्विअर्थी और आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में उन्हें सुबह गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ पूरी होने के बाद सेंगीपट्टी थाने से उन्हें रिहा किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उदयनिधि को सुबह करीब 11 बजे चेन्नई स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें तंजावुर के सेंगीपट्टी थाने ले जाया गया, जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में उनसे पूछताछ हुई। करीब एक घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें थाने से जमानत पर छोड़ दिया गया।
थाने के बाहर जुटे द्रमुक कार्यकर्ता
उदयनिधि के थाने पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने उदयनिधि के समर्थन में नारे लगाए और टीवीके सरकार के खिलाफ भी विरोध जताया।
पुलिस वाहन से उतरने के बाद उदयनिधि ने बाहर मौजूद समर्थकों की ओर हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। रिहाई के बाद भी थाने के बाहर समर्थकों की भीड़ जमा रही और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
कावेरी विवाद को लेकर प्रदर्शन के दौरान हुआ विवाद
मामला सोमवार को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर द्रमुक के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि ने मुख्यमंत्री की ओर से कावेरी विवाद को संभालने के तरीके की आलोचना की थी।
इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर नारे लगाए। आरोप है कि इसके बाद उदयनिधि ने कथित तौर पर द्विअर्थी टिप्पणी की। टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया और सोशल मीडिया समेत विभिन्न मंचों पर इसकी आलोचना होने लगी।
मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रिहाई
उदयनिधि की गिरफ्तारी के बाद मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने पुलिस को पूछताछ पूरी करने के बाद उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने भी अदालत के समक्ष उन्हें हिरासत में रखकर आगे की कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था।
इससे पहले द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने उदयनिधि की गिरफ्तारी को लेकर तमिलनाडु की टीवीके सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने गिरफ्तारी के तरीके पर सवाल उठाते हुए सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया और हिरासत में लिए गए द्रमुक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की।
उदयनिधि की रिहाई के बाद भी इस विवाद को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी जारी रहने के आसार हैं।








