भारत-अफगान रिश्तों पर पाकिस्तानी टिप्पणी से बौखलाहट उजागर: विदेश मंत्रालय

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नई दिल्ली :  भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने बढ़ते संबंधों को लेकर पाकिस्तान की आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी टिप्पणियां पड़ोसी देश की असुरक्षा और हताशा को दर्शाती हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-अफगानिस्तान संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और यही पाकिस्तान की परेशानी का कारण है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह प्रतिक्रिया दी। उनसे पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता जनरल अहमद चौधरी की उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर सवाल उठाते हुए धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल किया था और काबुल को कथित तौर पर ‘गैर-विश्वासियों’ से दूर रहने की सलाह दी थी।

जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तानी राज्य की ऐसी टिप्पणियां भारत-अफगानिस्तान संबंधों की सकारात्मक दिशा को लेकर उसकी असुरक्षा और हताशा को दर्शाती हैं।”

भारत की यह प्रतिक्रिया अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अत्ताउल्लाह उमरी की जुलाई में हुई भारत यात्रा के बाद आई है। नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान उमरी ने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा था कि उन्हें भारत में अपने लोगों के बीच होने जैसा महसूस होता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच साझा जुड़ाव और निकटता पर भी जोर दिया था।

सिंधु जल संधि पर भी भारत का रुख स्पष्ट

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जायसवाल ने सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भी भारत का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि यह संधि तब तक स्थगित यानी ‘अबेयन्स’ में रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन से विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से पीछे नहीं हटता।

जायसवाल ने कहा, “यह संधि अबेयन्स में है और तब तक अबेयन्स में रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन से अपरिवर्तनीय और विश्वसनीय रूप से पीछे नहीं हटता।”

इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी एक लेख में सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के भारत के फैसले का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि भारत का निर्णय केवल उस स्थिति को स्वीकार करता है, जिसे पाकिस्तान के आचरण ने पहले ही पैदा कर दिया था।

क्वात्रा के मुताबिक, पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से जल समझौते को लेकर दी जा रही युद्ध की धमकियों को उसके आंतरिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।

भारतीय राजदूत ने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का सहयोग चाहता है, तो उसे पहले अपने द्वारा बनाए गए आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा। उन्होंने संधि की प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता “सद्भावना और मित्रता की भावना” के साथ किया गया था, लेकिन पाकिस्तान ने वर्षों में इस सद्भावना और मित्रता को कमजोर किया है।