डेस्क : उत्तराखंड के चमोली जिले के मायापुर-पीपलकोटी में गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। यहां टीएचडीसी की ४४० मेगावाट विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना के लिए बनाई जा रही निर्माणाधीन सुरंग में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा घुस गया। हादसे के समय सुरंग के भीतर करीब २८ मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें कई मजदूर अंदर फंस गए।
घटना शाम करीब साढ़े छह बजे की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सेना की टीमें मौके पर पहुंच गईं। रात करीब साढ़े नौ बजे तक २० से २१ मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिए जाने की जानकारी सामने आई, जबकि कुछ मजदूरों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी था।
दलदल आने से फंसे मजदूर
बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक लखपत बुटोला के अनुसार, कंपनी के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक सुरंग में अचानक दलदल आने के कारण मजदूर फंस गए। उन्होंने बताया कि अधिकांश मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कुछ लोग अब भी अंदर फंसे थे। उन्होंने घटना की जांच की जरूरत भी बताई, क्योंकि पिछले वर्ष भी इस क्षेत्र में इसी तरह की घटना सामने आई थी।
घायलों का अस्पताल में इलाज
सुरंग से निकाले गए मजदूरों में कुछ को चोटें आई हैं। घायलों को उपचार के लिए गोपेश्वर के जिला अस्पताल भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार पांच घायलों को अस्पताल लाया गया, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई है। राहत एवं बचाव अभियान के लिए कई चिकित्सा दल और एंबुलेंस भी मौके पर भेजी गईं।
मुख्यमंत्री ने दिए युद्धस्तर पर बचाव के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरंग में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से लगातार स्थिति की जानकारी लेने की बात भी कही।
फिर याद आया सिलक्यारा हादसा
चमोली की इस घटना ने वर्ष २०२३ के सिलक्यारा सुरंग हादसे की यादें ताजा कर दी हैं। नवंबर २०२३ में उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में निर्माण के दौरान सुरंग का एक हिस्सा ढहने से ४१ मजदूर अंदर फंस गए थे। करीब १७ दिन चले चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।








