जयपुर : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर सियासी घमासान के बीच साहित्यकार आदित्य तिक्कू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हमारे संवाददाता ने जब उनसे इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि चिदंबरम जी देश के केंद्रीय गृह मंत्री रह चुके हैं और उन्हें नक्सलवाद की चुनौती और उसकी विचारधारा के बारे में किसी से बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
आदित्य तिक्कू ने कहा, “पी. चिदंबरम जी देश के गृह मंत्री रह चुके हैं। उनसे ज्यादा कौन समझ सकता है कि नक्सलवाद केवल जंगलों में बंदूक लेकर घूमने वालों का नाम नहीं है, बल्कि उसके पीछे एक विचारधारा भी होती है। प्रधानमंत्री ने जिस संदर्भ में ‘दिमागी नक्सल’ की बात कही, उसे समझने के बजाय खुद को ‘दिमागी नक्सली’ बताना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीति करते समय शब्दों की मर्यादा और जिम्मेदारी दोनों का ध्यान रखना चाहिए।
तिक्कू जी ने कहा, “देश ने नक्सलवाद की कीमत चुकाई है। हमारे जवानों ने अपनी जान दी है। ऐसे में नक्सली विचारधारा को लेकर किसी भी तरह का रोमांटिसिज्म या राजनीतिक मजाक उन लोगों के बलिदान का भी अपमान है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन दिया।”
उन्होंने आगे कहा,“गृह मंत्री की कुर्सी पर बैठ चुके व्यक्ति से देश यह उम्मीद करेगा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को राजनीति से ऊपर रखेंगे। असहमति जताइए, सवाल उठाइए, लेकिन नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती को हल्का मत बनाइए।”








