होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने पर ट्रंप का जोर, ईरान को दी चेतावनी

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वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की अपनी टिप्पणी दोहराई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का इस रणनीतिक जलमार्ग पर ‘‘पूरा नियंत्रण’’ है और ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी प्रभावी साबित हो रही है।

सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है और तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के चलते हर सप्ताह लाखों बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

ट्रंप ने कहा, ‘‘हम नाकेबंदी के जरिए इसे नियंत्रित कर रहे हैं। मुझे इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का विचार पसंद है।’’ हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ईरान जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाकर अमेरिकी और अन्य देशों के जहाजों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

ईरान की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि देश ‘‘बड़ी मुश्किल में है’’ और वहां महंगाई करीब 300 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।

इससे पहले शुक्रवार को लॉन्ग आइलैंड में एक रिपब्लिकन रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा था कि ईरान को हराने के बाद वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करने की योजना रखते हैं। उनका यह बयान पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सामने आया है।

ट्रंप ने ओमान को भी ईरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर किसी समझौते में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि मस्कट ने इस मामले में अमेरिकी रुख में हस्तक्षेप किया तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

इस बीच, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने ट्रंप के ‘‘ईरान को आत्मसमर्पण करना चाहिए’’ वाले बयान पर पलटवार किया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर रेजाई ने कहा कि ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा।

रेजाई ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘महान ईरान आत्मसमर्पण करने वालों में से नहीं है’’ और आत्मसमर्पण उन्हें करना चाहिए जो ‘‘शर्म और अपमान में भागते हैं।’’

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने पश्चिम एशिया के पहले से तनावपूर्ण हालात को और गंभीर बना दिया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इसके भविष्य को लेकर अमेरिकी और ईरानी रुख पर दुनिया की नजर बनी हुई है।