डेस्क : आरक्षण व्यवस्था को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आरक्षण विरोधी प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण के खिलाफ चल रहा आंदोलन सरकार की ओर से करवाया जा रहा है और इसके पीछे जाति जनगणना तथा सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों को लेकर लोगों में पैदा हुआ डर है।
चंद्रशेखर आजाद ने प्रदर्शनकारियों को राजनीतिक रास्ता अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि यदि सवर्ण समाज को लगता है कि कोई राजनीतिक दल उनकी बात नहीं सुन रहा है तो उन्हें अपना राजनीतिक दल बनाना चाहिए और लोकसभा तथा राज्यसभा में अपने प्रतिनिधि भेजने चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में प्रतिनिधित्व के जरिए कानून बनाने की प्रक्रिया में भागीदारी की जा सकती है।
उन्होंने आरक्षण को लेकर कहा कि यह किसी की खैरात नहीं, बल्कि संविधान द्वारा वंचित और सामाजिक भेदभाव का सामना करने वाले वर्गों को दिया गया प्रतिनिधित्व का अधिकार है। चंद्रशेखर ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
नगीना सांसद ने आरक्षण विरोधी आंदोलन को सामाजिक न्याय के मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि आरक्षण पर हमला सामाजिक न्याय पर हमला है। उन्होंने आरक्षण का विरोध करने वालों को तर्क और तथ्यों के आधार पर खुली बहस की चुनौती भी दी। उनका कहना है कि बहस संविधान और तथ्यों के दायरे में होनी चाहिए।
चंद्रशेखर ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है और अब इसे ‘आरक्षण में सुधार’ जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाया जा रहा है।
जंतर-मंतर पर 21 अगस्त को आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद उत्तर प्रदेश में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी इस आंदोलन को आरक्षण खत्म करने की साजिश बता चुके हैं। ऐसे में चंद्रशेखर आजाद के बयान ने आरक्षण के मुद्दे पर जारी सियासी टकराव को और तेज कर दिया है।








