डेस्क : तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे सियासी घमासान के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है। इन सांसदों से अयोग्यता याचिकाओं पर नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
यह कार्रवाई तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं के सिलसिले में हुई है। पार्टी ने इन सांसदों को पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में जाने के आधार पर अयोग्य ठहराने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस का तर्क है कि यह कदम संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का आधार बनता है।
२० सांसदों में कई बड़े नाम
बागी सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, जून मालिया और प्रसून बनर्जी समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। बागी सांसदों का दावा है कि उनके पास तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसदों का दो-तिहाई समर्थन है।
विलय को लेकर आमने-सामने दोनों पक्ष
बागी सांसदों का कहना है कि दो-तिहाई सांसदों के साथ दूसरी पार्टी में विलय होने के कारण उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होना चाहिए। वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि सांसदों का किसी दूसरी पार्टी में जाना अपने आप में वैध विलय नहीं माना जा सकता। अब इस पूरे मामले पर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष सुनवाई होगी।
उच्चतम न्यायालय में भी पहुंचा मामला
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध फैसला कराने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। २५ अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने उनकी याचिका पर २० बागी सांसदों को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि लोकसभा अध्यक्ष का कार्यालय पहले ही सांसदों को नोटिस जारी कर चुका है।
अब बागी सांसदों के जवाब के बाद लोकसभा अध्यक्ष यह तय करेंगे कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर दूसरी पार्टी में जाना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल है या कथित विलय के कारण उन्हें कानूनी संरक्षण मिल सकता है।








