डेस्क : उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के महिलाओं को सालाना आर्थिक सहायता देने के वादे पर निशाना साधा है। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव अपने पांच साल के मुख्यमंत्रित्व काल में पिछड़े वर्ग, दलितों, महिलाओं और युवाओं की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं दिखे, लेकिन चुनाव नजदीक आते ही नए वादे किए जा रहे हैं।
एएनआई से बातचीत में राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव पांच साल तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उस दौरान उन्हें पिछड़े वर्ग, दलित, महिलाएं और युवा नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिसके तहत महिलाओं की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
राजभर ने कहा कि सरकार की योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके खातों में सहायता राशि पहुंचाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव के चुनावी वादों को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि सत्ता में रहते हुए इन वर्गों के लिए क्या किया गया।
दरअसल, अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि भाजपा ‘नारी वंदन’ की बात करती है, लेकिन लोग हाथरस की घटना को नहीं भूल सकते। अखिलेश ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल किए।
इसी दौरान अखिलेश यादव ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की तैयारियों और संभावित घोषणाओं के संकेत दिए। उन्होंने महिलाओं के लिए ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ का उल्लेख करते हुए हर साल 40 हजार रुपये देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस राशि को बढ़ाया भी जाएगा।
अखिलेश यादव ने छात्रों के लिए लैपटॉप वितरण योजना दोबारा शुरू करने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर लैपटॉप बांटे गए थे और अब इंटरमीडिएट पास करने वाली छात्राओं को भी लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएंगे।
अखिलेश के इन ऐलानों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, जबकि समाजवादी पार्टी सत्ता में लौटने के लिए मैदान में उतरेगी। ऐसे में महिलाओं, युवाओं और पिछड़े वर्गों को लेकर दोनों खेमों के बीच राजनीतिक दावेदारी और तेज होने के आसार हैं।








