तपस्या आत्मशुद्धि का यज्ञ, संतोष से मिटता है लोभ : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी

0

जयपुर : अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में शनिवार को मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में तप अनुमोदना समारोह आयोजित किया गया। तेरापंथ महिला मंडल शहर के तत्वावधान में हुए इस आध्यात्मिक आयोजन में तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके आत्मबल और साधना के प्रति समाज ने श्रद्धा व्यक्त की।

समारोह में श्रीमती मोना देवी नागोरी के मासखमण (एकासण) तप, श्रीमती इन्द्र देवी डागा के मासिक एकांतर उपवास व्रत तथा श्रीमती मंजु देवी दूगड़ के मासिक एकांतर उपवास व्रत की परिसम्पन्नता पर समाज की विभिन्न सभा-संस्थाओं की ओर से तपस्वियों का सम्मान एवं अनुमोदना की गई।

समारोह को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि उपवास और व्रत मनोबल के बिना संभव नहीं हैं। तपस्या आत्मशुद्धि का यज्ञ है, जिसमें व्यक्ति को अपनी इंद्रियों और विशेष रूप से जिह्वा पर विजय प्राप्त करनी होती है। उन्होंने कहा कि मन प्रतिदिन अपनी पसंद की वस्तुओं की मांग करता है और उसे समझाकर वश में करना स्वयं में एक कठिन साधना है। तपस्या के माध्यम से आत्मशुद्धि के साथ शरीर को भी स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है।

‘निर्लोभता’ विषय पर आगमिक प्रवचन करते हुए मुनिश्री ने कहा, “गरीब वे नहीं जिसके पास धन नहीं है; गरीब वे हैं जिसके पास मन नहीं है।” उन्होंने कहा कि लोभ और लालच व्यक्ति को प्राप्त संपदा का आनंद भी नहीं लेने देते। धन का संग्रह तभी सार्थक है, जब उसके साथ संतोष और संयम का भाव भी हो।

इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी महाराज ने कहा कि संसार में चार प्रकार के अंधे बताए गए हैं—क्रोधांध, लोभांध, मोहांध और कामांध। भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोभ व्यक्ति के विवेक को समाप्त कर देता है और अंततः उसके सर्वनाश का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि अर्थ अनर्थ का मूल बन सकता है और लोभी व्यक्ति अपने स्वार्थ में अपनों के साथ भी छल करने से नहीं चूकता। लोभ और लालच का वास्तविक समाधान संतोष है।

कार्यक्रम में तेरापंथ महिला मंडल शहर की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जैन तथा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा के सहमंत्री श्री सुरेश बरड़िया ने भी तप अनुमोदना में अपने विचार रखे। सभा के मुख्य ट्रस्टी श्री आलोक हीरावत एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र बांठिया सहित अन्य पदाधिकारियों ने तपस्वियों को साहित्य भेंट कर उनका सम्मान किया।

समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं ने तपस्वियों की साधना की अनुमोदना करते हुए संयम, संतोष और आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।