डेस्क : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में विविधता और एकता को लेकर दिए गए बयान पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि अमेरिका में राहुल गांधी बोल रहे थे या मोहन भागवत।
भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और विविधता दोनों उसके डीएनए में हैं। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने, उसका सम्मान करने और उसकी रक्षा करने की बात कही।
भागवत के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिब्बल ने आरोप लगाया कि आरएसएस प्रमुख विदेश में विविधता की बात करते हैं, लेकिन भारत में उसी विविधता को लेकर अलग रुख दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि विदेश में विविधता को स्वीकार करने की बात और देश में लोगों को अपनी तरह से जीने की अनुमति नहीं देना विरोधाभासी है।
सिब्बल ने कहा कि राहुल गांधी भी लगातार देश की विविधता और सभी समुदायों के सम्मान की बात करते रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब देश में भीड़ हिंसा जैसी घटनाएं होती हैं, तब क्या भागवत ने उनके खिलाफ आवाज उठाई है।
‘विविधता की रक्षा पर भारत में भी बोलें’
सिब्बल ने कहा कि यदि विविधता का जश्न मनाना, उसका सम्मान करना, उसे स्वीकार करना और उसकी रक्षा करना जरूरी है, तो यही सिद्धांत भारत में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने भागवत से सवाल किया कि क्या उन्होंने देश में विविधता की रक्षा नहीं होने के मामलों पर कभी आवाज उठाई है।
सिब्बल ने राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए भी भागवत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि विविधता और सभी समुदायों के सम्मान की बात की जाती है, तो अतीत की घटनाओं पर भी स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए।
‘विदेश में अच्छी बातें, घर में चुप्पी’
सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश में विविधता को लेकर अच्छी बातें कही जाती हैं, लेकिन देश में होने वाली घटनाओं पर चुप्पी रहती है। सिब्बल ने कहा कि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कार्यों से भी विचारों की पुष्टि होनी चाहिए।








