डेस्क : देश की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के सरकारी आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि देश की जनता महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन आंकड़ों का वास्तविक लाभ आम लोगों तक कितना पहुंच रहा है।
मायावती ने शुक्रवार को सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि यदि सरकार की ओर से जारी उच्च विकास दर के आंकड़े सही हैं तो यह अच्छी बात है, लेकिन यदि ये केवल आंकड़ों का ‘जुगाड़’ हैं तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से विकास दर के आंकड़ों की विश्वसनीयता स्पष्ट करने और यह बताने की मांग की कि इसका लाभ देश की करोड़ों गरीब और मेहनतकश जनता को किस तरह मिला है।
जमीनी बदलाव को बताया असली विकास
बसपा प्रमुख ने कहा कि केवल विकास दर बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। विकास की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिए कि उसका असर आम लोगों के जीवन पर दिखाई दे। उनके अनुसार, आर्थिक विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब इससे गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार में कमी आए तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो।
मायावती ने कहा कि देश के करोड़ों मेहनतकश लोगों को विकास का लाभ मिलना और उसका असर महसूस होना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि यदि ऐसा नहीं होता तो ऊंची विकास दर के आंकड़ों के बावजूद आम जनता की परेशानियां बनी रहेंगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों के फैसले पर भी टिप्पणी
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि और सुरक्षा कवर देने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इसके बजाय लोगों को सीधे सरकारी नौकरी देना अधिक बेहतर होता। उनका आरोप है कि इससे अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार और शोषण जैसी समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है।








