डेस्क : मलयालम सिनेमा में इस साल एक ऐसी फिल्म आई है, जिसकी कहानी मां-बेटे के रिश्ते और बिछड़ने के दर्द को केंद्र में रखती है। जुलाई में रिलीज हुई ‘बालन द बॉय’ को आईएमडीबी पर 8 की रेटिंग मिली है। फिल्म की कहानी एक मां इंदु और उसके बेटे बालन के इर्द-गिर्द घूमती है।
जेल से निकलने के बाद बदल जाती है जिंदगी
फिल्म की कहानी इंदु नाम की महिला से शुरू होती है, जो जेल में अपने बेटे बालन को जन्म देती है। जेल से रिहा होने के बाद वह बेटे के साथ नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश करती है। इंदु को लगातार पकड़े जाने का डर रहता है, इसलिए वह अलग-अलग जगहों पर काम करती है और अपनी तथा बेटे की पहचान बदलती रहती है।
इंदु बेटे को भी हर जगह अलग नाम और कहानी बताती है, ताकि दोनों की बातें एक जैसी रहें और किसी को उनके अतीत का पता न चले। इस लगातार भागदौड़ के बीच बालन का बचपन भी प्रभावित होता जाता है।
बूढ़ी महिला देती है सहारा
कहानी में उस समय बदलाव आता है जब इंदु को एक बुजुर्ग महिला की देखभाल का काम मिलता है। बुजुर्ग महिला के परिवार के लोग विदेश में रहते हैं और घर में वह अकेली रहती है। इंदु और बालन को यहां अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल मिलता है।
एक दिन बुजुर्ग महिला इंदु से उसके अतीत के बारे में पूछती है। इंदु सीधे अपनी कहानी बताने के बजाय एक काल्पनिक कहानी सुनाती है। हालांकि, बुजुर्ग महिला धीरे-धीरे समझ जाती है कि यह कहानी दरअसल इंदु की अपनी जिंदगी से जुड़ी है और वह उसे अपने घर में रहने का भरोसा देती है।
एक के बाद एक मुश्किलें
इंदु को सुरक्षित जीवन मिलने लगता है और बालन स्कूल जाने लगता है। लेकिन उसकी पुरानी जिंदगी फिर सामने आ जाती है। एक महिला, जिसे इंदु जेल के दौरान जानती थी, उसके पास पहुंचती है। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदलता है और इंदु पर हत्या का आरोप लग जाता है।
बालन अपनी मां से अलग हो जाता है। पुलिस उसकी तलाश करती है, जबकि बालन भी अपनी मां को खोजने की कोशिश करता है। कई साल बीत जाते हैं और बालन बड़ा हो जाता है, लेकिन मां की याद उसके मन से नहीं जाती।
सालों बाद होती है मां-बेटे की मुलाकात
कहानी में भावुक मोड़ तब आता है जब बड़ा हो चुका बालन एक पुराने स्थान पर पहुंचता है और उसकी मुलाकात उसी पुलिस अधिकारी से होती है, जिसने बचपन में उसकी मां को पकड़ने की कोशिश की थी। बालन अपनी मां से मिलने की इच्छा जताता है।
हालांकि, जेल में जिस महिला से उसकी मुलाकात कराई जाती है, वह उसकी मां इंदु नहीं होती। इंदु ने अपने ऊपर लगे आरोपों से बचने के लिए किसी दूसरी महिला को इसके लिए जिम्मेदार बना दिया था।
आखिरकार बालन उसी बस अड्डे पर लौटता है, जहां उसकी मां ने बचपन में उससे मिलने का वादा किया था। वह रो रहा होता है, तभी पीछे से इंदु आती है। कई वर्षों के बाद मां और बेटे की मुलाकात होती है और दोनों नई पहचान के साथ आगे की जिंदगी शुरू करने के लिए निकल जाते हैं।
फिल्म की कहानी मां-बेटे के रिश्ते, संघर्ष, बिछड़ने और दोबारा मिलने की भावनाओं को सामने रखती है। यही वजह है कि इसे इस साल की भावुक मलयालम फिल्मों में शामिल किया जा रहा है और आईएमडीबी पर इसे 8 की मजबूत रेटिंग मिली है।








