डेस्क : केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाओं के बीच भाजपा सांसदों की दिल्ली में मौजूदगी बढ़ गई है। कई सांसद अपने संसदीय क्षेत्रों में जाने के बजाय राजधानी में डटे हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संसद की कार्यवाही से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम के गठन के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बदलाव की अटकलों ने जोर पकड़ा है। केंद्र सरकार में कुछ मंत्री पद रिक्त हैं। ऐसे में संगठन में जिम्मेदारी नहीं पाने वाले कुछ सांसदों को सरकार में स्थान मिलने की चर्चा है। हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
संसद सत्र को लेकर भी चर्चा
मॉनसून सत्र के बाद संसद को दोबारा बुलाए जाने की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है। माना जा रहा है कि सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर सकती है। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर भी संभावनाएं जताई जा रही हैं। ऐसे में सांसदों का दिल्ली में रहना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश पर नजर
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर भी भाजपा का ध्यान रहने की संभावना है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश को लेकर पार्टी की रणनीति पर नजर है। वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल में बदलाव को चुनावी तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा और किन सांसदों को केंद्रीय सरकार में जगह मिलेगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सूची या तारीख सामने नहीं आई है।








