नेपाल में भीषण तबाही, 1,331 की मौत; भारत के 54 विशेषज्ञ बचाव अभियान में जुटे

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काठमांडू : हिमालयी देश नेपाल में भारी बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। देशभर में प्राकृतिक आपदा से मरने वालों की संख्या 1,331 पहुंच गई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) की ओर से शनिवार शाम 6 बजे जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले दोपहर में मृतकों की संख्या 1,344 बताई गई थी। प्रभावित इलाकों में शनिवार को भी खोज और बचाव अभियान जारी रहा।

बचाव दल ने अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना की ऑडिट सुरंग से एक चीनी नागरिक को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके अलावा नुवाकोट के बेत्रावती से 64 वर्षीय एक महिला को भी बचाया गया।

इस बीच भारत और नेपाल की संयुक्त टीमें चिलिमे सुरंग के अंदर बचाव अभियान चला रही हैं। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि भारी मलबे, पानी और कीचड़ के बीच भारतीय बचाव दल नेपाल सेना के साथ मिलकर अभियान में जुटे हुए हैं।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि चिलिमे सुरंग के अंदर जमा भारी मलबे, पानी और कीचड़ को लगातार हटाया जा रहा है। कई हिस्सों में मलबा और पानी सुरंग की छत के करीब पहुंच गया है। इसका उद्देश्य सुरंग के अंदर भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए रास्ता तैयार करना है।

उन्होंने बताया कि सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए पास के स्याफ्रुबेसी से एक सड़क बनाने का काम भी चल रहा है। दुर्गम पहाड़ी इलाका और संकरी घाटी होने के कारण भारी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल संभव नहीं है। ऐसे में सड़क तैयार होने के बाद खुदाई करने वाली मशीनों को सुरंग तक पहुंचाकर बचाव अभियान को तेज किया जा सकेगा।

नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बीच भारत ने राहत एवं बचाव प्रयासों में अपनी मदद और बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अब तक सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसके साथ ही बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए 54 विशेषज्ञ कर्मियों को भी नेपाल भेजा गया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत नेपाल सरकार की जरूरतों के अनुसार आगे भी सहायता जारी रखेगा। आने वाले दिनों में अतिरिक्त फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और नेपाल सरकार की ओर से मांगी गई अन्य आवश्यक सामग्री भेजी जाएगी।

भारत की ओर से भेजे गए 54 विशेषज्ञों में 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल हैं। भारतीय बचाव और फोरेंसिक टीमें नेपाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं।