सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन पर विवाद, गहलोत ने उठाए सरकार पर सवाल

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जयपुर : कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आत्मकथा के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पुस्तक के भारतीय संस्करण के प्रकाशन से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के पीछे हटने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले में सरकार की कथित भूमिका को लेकर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि आखिर सच्चाई सामने आने से क्यों रोका जा रहा है।

गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी की आत्मकथा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशन होने जा रहा है, लेकिन भारत में इसके प्रकाशन को लेकर अड़चन पैदा होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। गहलोत के अनुसार, पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और चीन से जुड़े कुछ संदर्भों को लेकर आपत्ति जताए जाने की चर्चा है।

हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने पुस्तक के प्रकाशन से पीछे हटने के पीछे किसी बाहरी दबाव से इनकार किया है। प्रकाशक की ओर से कहा गया है कि लेखिका के प्रतिनिधियों और प्रकाशक के बीच एक विशेष मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके कारण भारत में पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। प्रकाशक ने समझौते की गोपनीयता का हवाला देते हुए विवाद के विस्तृत कारणों का खुलासा नहीं किया है।

नए प्रकाशक के साथ आएगी पुस्तक

पेंगुइन के साथ प्रकाशन समझौता आगे नहीं बढ़ने के बाद सोनिया गांधी की आत्मकथा के भारतीय संस्करण के लिए हार्पर कॉलिन्स इंडिया सामने आया है। पुस्तक का वैश्विक प्रकाशन नवंबर में प्रस्तावित है। ऐसे में भारत में इसके प्रकाशन को लेकर पैदा हुआ विवाद राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।

कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को अभिव्यक्ति और प्रकाशन की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, भाजपा की ओर से सरकार को इस विवाद में घसीटे जाने पर कांग्रेस से सवाल किए गए हैं। पुस्तक के प्रकाशन को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है, इस पर राजनीतिक और साहित्यिक दोनों क्षेत्रों की नजर बनी हुई है।