वृन्दावन :सनातन संस्कृति के संवाहक, आध्यात्मिक चेतना के साधक और समाजसेवा के लिए समर्पित महामंडलेश्वर स्वामी श्याम चेतन पुरी जी महाराज के जन्मदिवस पर देश-विदेश में उनके भक्तों और अनुयायियों के बीच श्रद्धा, उत्साह और उल्लास की लहर है।विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालु धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से महाराजश्री का जन्मदिवस मना रहे हैं। उनके अनुयायियों के लिए यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि उनके विचारों और सेवा-संकल्प को आगे बढ़ाने का भी अवसर है।
स्वामी श्याम चेतन पुरी जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या और सेवा की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व भी है। यांत्रिक अभियांत्रिकी में डिप्लोमा और प्रतिष्ठित कंपनी में कार्य करने के बाद वर्ष 1990 में उन्होंने सांसारिक जीवन का मोह त्यागकर आध्यात्मिक पथ को अपनाया। नर्मदा परिक्रमा और दीर्घ साधना के पश्चात उन्होंने अपने गुरु के सान्निध्य में आध्यात्मिकता और सनातन संस्कृति का गहन अध्ययन किया।
इसके बाद उनका जीवन सनातन संस्कृति के जागरण और समाज के वंचित वर्गों की सेवा को समर्पित रहा। आदिवासी समाज में शिक्षा का प्रसार, विद्यालयों और गौशालाओं के निर्माण में योगदान, जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था तथा निर्धन कन्याओं के विवाह में सहयोग जैसे अनेक सेवा कार्य उनके सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करते हैं।
महाराजश्री का स्पष्ट मत है कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति का नाम नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, सेवा, संयम और सद्भाव से जोड़ने वाली जीवनदृष्टि है। इसी दृष्टि को वे समाज के प्रत्येक वर्ग और विशेष रूप से युवा पीढ़ी तक पहुंचाने पर बल देते हैं।
जन्मदिवस पर युवाओं के नाम संदेश
अपने जन्मदिवस के अवसर पर स्वामी श्याम चेतन पुरी जी महाराज ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज की युवा शक्ति अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और सामर्थ्य को राष्ट्र निर्माण में लगाए। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों को पहचानने और सनातन संस्कृति के मूल्यों को समझने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि जब युवा अपनी संस्कृति से जुड़ता है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागता है। आध्यात्मिकता मनुष्य को भीतर से मजबूत करती है और उसे समाज तथा राष्ट्र के लिए कुछ करने की प्रेरणा देती है।
महाराजश्री ने विश्व के लिए शांति और मानवता का संदेश देते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा का मूल भाव समस्त मानवता के कल्याण में निहित है। समाज में भेदभाव, हिंसा और वैमनस्य के स्थान पर परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव की स्थापना ही समय की आवश्यकता है।
उनके जन्मदिवस पर भक्तों और अनुयायियों में उमंग है। कहीं धार्मिक आयोजन हो रहे हैं, तो कहीं सेवा कार्यों के माध्यम से महाराजश्री के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जा रही है। उनके अनुयायी इस अवसर को सनातन संस्कृति, सेवा और राष्ट्रहित के संकल्प को और दृढ़ करने के पर्व के रूप में देख रहे हैं।








