आत्मशुद्धि और आत्मनिरीक्षण का महान पर्व है संवत्सरी : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी

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जयपुर : अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन संवत्सरी महापर्व श्रद्धा, साधना और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिनभर चले आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की और तप, साधना एवं आत्मनिरीक्षण के माध्यम से अंतर्मन की शुद्धि का प्रयास किया।

मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने संवत्सरी महापर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संवत्सरी आत्मशुद्धि का महान पर्व है। यह व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकने, अपनी गलतियों और कमियों को पहचानने तथा उनमें सुधार का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है। आत्मालोचन और आत्मनिरीक्षण के इस पर्व से व्यक्ति को सरल बनने तथा अपने जीवन के परिष्कार की प्रेरणा मिलती है।

प्रवचन के दौरान मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी ने भगवान महावीर के जीवन, दर्शन और उनके संदेशों से श्रावक-श्राविकाओं को परिचित कराया। उन्होंने भगवान महावीर के जीवन-दर्शन को वर्तमान जीवन के लिए प्रासंगिक बताते हुए उससे जीवन-बोध प्राप्त करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के जप-अनुष्ठान तथा प्रेक्षाध्यान के प्रयोगों से हुआ। इसके पश्चात तीर्थंकर भगवान महावीर की स्तुति की गई। तेरापंथ महिला मंडल शहर की ओर से महारानी फार्म की बहनों ने गीत प्रस्तुत किया। श्री संदीप भंडारी, श्री सौरभ जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी और अपने विचार व्यक्त किए।

संवत्सरी महापर्व पर तप और साधना का भी विशेष वातावरण रहा। कार्यक्रम में एक हजार से अधिक उपवास हुए। अनेक श्रद्धालुओं ने बेले, तेले और अठ्ठाई जैसे तप के प्रत्याख्यान किए, जबकि सैकड़ों लोगों ने पौषध व्रत की साधना की।

इस अवसर पर श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री शांतिलाल गोलछा सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने तपस्वियों के तप की अनुमोदना की और उनकी साधना के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

अणुविभा केन्द्र में बुधवार को ‘मैत्री पर्व’ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रावक-श्राविकाएं परस्पर मिलकर एक-दूसरे से क्षमायाचना करेंगे और मैत्री, प्रेम तथा आत्मीयता का संदेश देंगे।