डेस्क : अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनाव से पहले डाक के जरिए मतदान यानी मेल बैलेट को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की ओर से मेल-इन बैलेट पर नए प्रतिबंध लागू करने की कोशिश को रोक दिया। फैसले के बाद ट्रंप ने अदालत पर तीखा हमला बोला और अपने ही द्वारा नियुक्त किए गए कुछ न्यायाधीशों पर भी नाराजगी जताई।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत पर कट्टरपंथी वामपंथियों का दबाव है और उसके फैसले अमेरिका को पीछे धकेल रहे हैं। ट्रंप ने विशेष रूप से उन न्यायाधीशों को लेकर निराशा जताई, जिन्हें उन्होंने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आपातकालीन आदेश में ट्रंप प्रशासन के उस प्रस्ताव को लागू करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत डाक से मतदान की प्रक्रिया में नए नियम लागू किए जाने थे। प्रस्ताव में राज्यों के लिए एक समान लिफाफे का इस्तेमाल और पात्र मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन संघीय पोर्टल पर उपलब्ध कराने जैसी शर्तें शामिल थीं।
प्रशासन का तर्क था कि अमेरिकी डाक सेवा को चुनावी डाक के नियम तय करने का अधिकार है और इससे चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने चुनाव से कुछ सप्ताह पहले व्यवस्था में बड़े बदलाव को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों और मतदाताओं को संभावित परेशानी की आशंका जताई थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव में राज्यों में पहले से लागू मेल बैलेट व्यवस्था फिलहाल जारी रहेगी। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन के चुनाव संबंधी एजेंडे के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।








