33वें विकास महोत्सव के अंतर्गत दीक्षा समारोह से तेरापंथ धर्मसंघ का हुआ विकास

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लाडनूं : जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ की राजधानी के रूप में सुविख्यात लाडनूं नगर में स्थित जैन विश्व भारती में योगक्षेम वर्ष का सुदीर्घकालीन प्रवास सुसम्पन्न कर रहे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, अखण्ड परिव्राजक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने तेरापंथ धर्मसंघ के 33वें विकास महोत्सव के दिन सात मुमुक्षुओं को साधु, साध्वी व समणी दीक्षा प्रदान कर तेरापंथ धर्मसंघ के विकास को मानों नवीन गति प्रदान की। ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित इस दीक्षा समारोह में हजारों श्रद्धालुओं की विराट उपस्थिति के साथ-साथ चारित्रात्माओं की भी विशाल उपस्थिति रही। आचार्यश्री के श्रीमुख से निकली हुई आर्षवाणी से मुमुक्षुओं को चारित्र रत्न की प्राप्ति हुई। इस दृश्य को हजारों नेत्रों निहारकर अपने जीवन को धन्य बनाया।
योगक्षेम वर्ष के सुदीर्घकाल के दौरान तेरापंथ धर्मसंघ के सारे महनीय आयोजन लाडनूं की धरा पर स्थित जैन विश्व भारती परिसर में समायोजित हो रहे हैं। ऐसा सौभाग्य प्राप्त कर लाडनूंवासी अपने सौभाग्य की सराहना करते नहीं अघा रहे हैं। रविवार को प्रातःकाल सुधर्मा सभा युगप्रधान अनुशास्ता आचार्यश्री के पदार्पण से पूर्व ही जनाकीर्ण नजर आ रहा था। 33वें विकास महोत्सव के साथ-साथ आयोजित होने वाले दीक्षा समारोह के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
आचार्यश्री व युवाचार्यश्री चारित्रात्माओं सहित मंचासीन हुए तो मानों श्वेत आध्यात्मिक रश्मियों से पूरा पण्डाल आलोकित होने लगा। विकास महोत्सव के संदर्भ में सर्वप्रथम तेरापंथ महिला मण्डल-लाडनूं ने गीत का संगान किया। साध्वीवृंद ने भी विकास महोत्सव के संदर्भ में गीत को प्रस्तुति दी। विकास परिषद के संयोजक श्री मांगीलाल सेठिया ने अपनी अभिव्यक्ति दी। विकास परिषद के सदस्य श्री पदमचंद पटावरी ने भी अपने विचारों को अभिव्यक्ति दी।
दीक्षा समारोह के अंतर्गत दीक्षार्थी मुमुक्षु अर्चना मेहता, मुमुक्षु सुमन बैद, मुमुक्षु सुमन नाहटा, मुमुक्षु भावना नाहटा, मुमुक्षु कोमल भंसाली, मुमुक्षु रुचिका मालू तथा मुमुक्षु बाबूलाल बाफना ने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए शीघ्र दीक्षा प्रदान कर भवसागर से तारने की प्रार्थना की। मुमुक्षु मिमांशा, व मुमुक्षु छवि ने सभी दीक्षार्थियों का परिचय प्रस्तुत किया। पारमार्थिक शिक्षण संस्था के अध्यक्ष श्री बजरंग जैन दीक्षार्थियों के आज्ञा पत्र का वाचन किया। दीक्षार्थियों के पारिवारिक सदस्यों द्वारा उन आज्ञा पत्रों को आचार्यश्री के करकमलों में समर्पित किया गया।
तदुपरान्त जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान देदीप्यमान महासूर्य, युगप्रधान, विकास पुरुष आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपनी अमृतवाणी से श्रद्धालु जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि धर्म की साधना मंगलकारी होती है। आज का दीक्षा समारोह धर्म के लिए संकल्प ग्रहण करने का समारोह है। सात मुमुक्षु यहां उस संकल्प लेने के लिए उपस्थित हैं। इनके परिवार से लिखित आज्ञा पत्र तो प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन मैं मौखिक रूप से भी उनके परिजनों की आज्ञा जानना चाहता हूं। दीक्षार्थियों के परिजनों ने अपने स्थान पर करबद्ध खड़े होकर दीक्षा प्रदान करने का निवेदन किया। आचार्यश्री ने सभी दीक्षार्थियों की भावनाओं का अंतिम परीक्षण किया। इसके उपरान्त आचार्यश्री ने आर्षवाणी का उच्चारण करते पांच मुमुक्षु बाइयों व एक मुमुक्षु भाई को साधु-साध्वी दीक्षा प्रदान कर दी। उसके उपरान्त निर्धारित पाठ का उच्चारण कर आचार्यश्री ने एक दीक्षार्थी मुमुक्षु बहन को समणी दीक्षा भी प्रदान की। नवदीक्षित साधु, साध्वियों व समणीजी ने आचार्यश्री को सविनय व सविधि वंदन किया। तदुपरान्त आचार्यश्री ने पुनः आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए अतीत की आलोचना कराई।
केश लोच की परंपरा के अंतर्गत आचार्यश्री ने सद्यः दीक्षित मुनिजी का केशलोच आचार्यश्री ने किया तथा शेष साध्वियों व समणीजी के केशलोच संस्कार को सम्पन्न किया। आचार्यश्री ने कहा कि आगे प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि इस विकास महोत्सव के दिन आज कुल सात दीक्षाएं हुई हैं। आज के ही दिन परम पूज्य गुरुदेव तुलसी ने नब्बे वर्ष पूर्व गंगापुर में तेरापंथ के धर्मसंघ के दायित्व को संभाला। आचार्यश्री ने आगामी वर्ष 2036 में परम पूज्य गुरुदेव तुलसी के आचार्य पद प्राप्ति के शताब्दी सम्पन्नता समारोह मनाए जाने की घोषणा की।
आचार्यश्री ने त्याग और विनय के आधार पर स्थापित इस विकास महोत्सव के महत्त्व का वर्णन करते हुए कहा कि आचार्यश्री महाप्रज्ञजी की दीक्षा ग्रहण के भी सौ वर्ष सम्पन्न होने वाले हैं तो इस संदर्भ में भी आचार्यश्री महाप्रज्ञजी दीक्षा शताब्दी सम्पन्नता समारोह बनाने का भी भाव है। इन घोषणाओं के उपरान्त आचार्यश्री ने नवदीक्षित मुनिजी को रजोहरण प्रदान किया तो साध्वीप्रमुखाजी ने नवदीक्षित साध्वियों को रजोहरण प्रदान किया। आचार्यश्री ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्यश्री ने नामकरण संस्कार के क्रम को संपादित करते हुए मुमुक्षु बाबूलाल बाफना को मुनि हितकुमारजी, मुमुक्षु सुमन नाहटा को साध्वी सुपार्श्वप्रभाजी, मुमुक्षु सुमन बैद को साध्वी ओमप्रभाजी, मुमुक्षु अर्चना मेहता को साध्वी अर्चनाप्रभाजी, मुमुक्षु रुचिका को साध्वी धर्मार्थप्रभाजी मुमुक्षु कोमल को साध्वी कोमलप्रभाजी तथा मुमुक्षु भावना को समणी भक्तिप्रज्ञाजी नाम प्रदान किया। नवदीक्षित साधु-साध्वियों को श्रावक-श्राविका समाज ने वंदन किया। आचार्यश्री ने नवदीक्षित साधु, साध्वियों तथा समणीजी को यतनापूर्वक अपने कार्य करने व संयमयुक्त जीवन जीने और आत्मकल्याण करने की प्रेरणा प्रदान की।
आचार्यश्री ने विकास महोत्सव के आधार पत्र का वाचन करने के उपरान्त आचार्यश्री ने विकास महोत्सव पर स्वयं द्वारा रचित गीत का संगान किया। उस गीत को युवाचार्यश्री सहित चतुर्विध धर्मसंघ ने गाया। विकास महोत्सव के अवसर पर आचार्यश्री ने साधु-साध्वियों को विहार करने आदि से संदर्भित दिशा-निर्देश प्रदान किए।
आचार्यश्री ने नवदीक्षित साध्वियों को साध्वीप्रमुखाजी के अंतर्गत शिक्षण-प्रशिक्षण प्राप्त करने को सौंपा तो नवदीक्षित मुनिजी को आचार्यश्री ने मुनि नयकुमारजी के अंतर्गत शिक्षण-प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु सौंपा। नवदीक्षित समणी को आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण साध्वीवर्याजी के निर्देशन में ग्रहण करने का आदेश दिया। इस अवसर पर युवाचार्यश्री ने विकास महोत्सव  के संदर्भ में संबोधन प्रदान किया।
आचार्यश्री सहित चतुर्विध धर्मसंघ ने अपने स्थान पर खड़े होकर संघगान किया। इसके साथ ही तेरापंथ धर्मसंघ का 33वां विकास महोत्सव व दीक्षा समारोह सुसम्पन्न हुआ।