यूक्रेन से भारत-ईयू एफटीए तक, जयशंकर की यूरोपीय विदेश मंत्रियों से अहम मुलाकातें

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डेस्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में कई यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में यूक्रेन संघर्ष, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA), व्यापार एवं निवेश, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, संपर्क और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन, फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन और स्लोवेनिया के विदेश मंत्री टोने काजेर से मुलाकात की। नीदरलैंड के विदेश मंत्री के साथ बैठक में यूक्रेन संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस वर्ष की नीदरलैंड यात्रा के दौरान तय किए गए समझौतों और पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की।

फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन के साथ बैठक में मौजूदा भू-राजनीतिक और तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत और फिनलैंड के द्विपक्षीय संबंध मजबूत हैं तथा यूरोपीय संघ के साथ सहयोग भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

स्लोवेनिया के विदेश मंत्री टोने काजेर के साथ बातचीत में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के क्रियान्वयन की दिशा में उभर रहे व्यापार और निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने ऊर्जा, विनिर्माण, डिजिटल क्षेत्र, संपर्क, रक्षा और बहुपक्षीय सहयोग सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

कैरिकॉम देशों के साथ सहयोग पर जोर

जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत-कैरिकॉम (CARICOM) विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कैरेबियाई देशों के साथ भारत की एकजुटता और साझा विकास संबंधी चुनौतियों का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि कई कैरिकॉम देशों में लघु एवं मध्यम स्तर की परियोजनाएं और क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं, जबकि कुछ परियोजनाएं अभी जारी हैं। भारत की ओर से कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर, हेमोडायलिसिस इकाइयों और चिकित्सा सुविधाओं के लिए बीएचआईएसएम क्यूब जैसी सहायता का भी उल्लेख किया गया।

जयशंकर ने कैरिकॉम देशों से भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षण अवसरों का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया और जरूरत के अनुसार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराने की पेशकश की। उन्होंने क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस से जुड़ने का भी आह्वान किया।

प्रशांत देशों के साथ विकास साझेदारी पर चर्चा

विदेश मंत्री ने भारत-फिपिक (FIPIC) विदेश मंत्रियों की बैठक की भी अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण मांग आधारित, विकास केंद्रित और जन-केंद्रित है। उन्होंने प्रशांत द्वीप देशों के साथ स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, संपर्क, तकनीक और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में चल रही विकास परियोजनाओं की प्रगति का उल्लेख किया।

जयशंकर ने प्रशांत द्वीप देशों के सामने एल नीनो से उत्पन्न चुनौतियों का भी जिक्र किया और इसके प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में भारत की सहायता की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अंतरिक्ष सहयोग तथा टिकाऊ तटीय और महासागरीय अनुसंधान को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।

उन्होंने प्रशांत देशों से अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) से जुड़ने का आग्रह किया।

जयशंकर की ये बैठकें संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा हैं। इन बैठकों में यूरोप, कैरेबियाई और प्रशांत देशों के साथ व्यापार, तकनीक, विकास सहयोग, ऊर्जा, संपर्क, रक्षा और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे।