डेस्क : इजरायली शोधकर्ता येशाया रोसेनमैन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए संगठन में मेहनत, योग्यता और समर्पण को आगे बढ़ने का आधार बताया है। उन्होंने कहा कि संगठन में किसी व्यक्ति की प्रगति जाति या आर्थिक स्थिति के बजाय उसकी मेहनत और क्षमता के आधार पर होनी चाहिए। उनके अनुसार, यह दृष्टिकोण भारत के युवाओं के लिए प्रेरणादायक हो सकता है।
रोसेनमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी कार्यशैली और उपलब्धियां उनकी प्रगति का प्रमुख आधार रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक पहचान से भारत के सम्मान को भी बढ़ावा मिला है।
संघ के सदस्यों के समर्पण की सराहना
आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने पर प्रकाशित पुस्तक ‘हंड्रेड इयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ में रोसेनमैन सहित 18 युवा उपलब्धि हासिल करने वालों और शोधकर्ताओं के अनुभव शामिल किए गए हैं।
संघ के साथ अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन के सदस्य मित्रवत हैं और खुले दिल से लोगों का स्वागत करते हैं। उन्होंने सदस्यों के अपने उद्देश्य के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत लाभ के बजाय अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के साथ काम करते हैं।
सामाजिक कार्यों और सांस्कृतिक पहचान पर जोर
रोसेनमैन ने कहा कि आरएसएस की गतिविधियां केवल विचारधारा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और उसे आगे बढ़ाने में संगठन के योगदान का उल्लेख किया।
उन्होंने विकास और सुशासन के महत्व पर भी चर्चा की। स्वच्छ पेयजल, शौचालय, रसोई गैस, बैंक खातों और बुनियादी ढांचे जैसी सुविधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में हुए बदलाव आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।
भारत की सभ्यता को समझने की अपील
इजरायली शोधकर्ता ने पश्चिमी देशों के लोगों से अपील की कि वे भारत की सभ्यता, इतिहास, गणित, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को पूर्वाग्रह से मुक्त होकर समझें। उन्होंने कहा कि भारत और पश्चिमी देशों के बीच संवाद एवं सहयोग से सांस्कृतिक समझ को बढ़ाया जा सकता है।
रोसेनमैन ने यह भी सुझाव दिया कि आरएसएस के बारे में कोई राय बनाने से पहले लोगों को संगठन के सदस्यों से सीधे बातचीत करनी चाहिए और उसके इतिहास तथा सामाजिक गतिविधियों को समझना चाहिए।









