डेस्क : देश के आठ प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में बिना बिके आवासीय मकानों का स्टॉक 2026 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़कर 5,25,695 इकाइयों पर पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी वर्ष 2020 से जारी इन्वेंट्री जमा होने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। हालांकि, बाजार में एक दिलचस्प बदलाव भी देखने को मिला है। कम कीमत वाले मकानों की बिक्री अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है, जबकि बिना बिके मकानों का बड़ा हिस्सा अब प्रीमियम और लग्जरी श्रेणी में केंद्रित हो रहा है।
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले मकानों की बिना बिकी इन्वेंट्री सालाना आधार पर 7 प्रतिशत घटकर 1,71,363 इकाइयों पर आ गई। वहीं, 50 लाख से 1 करोड़ रुपये की श्रेणी में यह स्टॉक 3 प्रतिशत घटकर 1,34,841 इकाइयों पर रहा। सीमित नई आपूर्ति और इन श्रेणियों में लगातार हो रही बिक्री को इसके पीछे प्रमुख कारण माना गया है।
इसके उलट महंगे मकानों की श्रेणी में बिना बिके स्टॉक तेजी से बढ़ा है। 1 से 2 करोड़ रुपये की कीमत वाले मकानों की इन्वेंट्री में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, 2 से 5 करोड़ रुपये की श्रेणी में स्टॉक 43 प्रतिशत बढ़कर 65,671 इकाइयों पर पहुंच गया। 5 से 10 करोड़ रुपये वाले मकानों की इन्वेंट्री में 23 प्रतिशत और 20 से 50 करोड़ रुपये की श्रेणी में 52 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई।
पुराने मकानों की बिक्री में सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक, बिना बिके मकानों की औसत आयु में कुछ सुधार हुआ है। यह 2025 की पहली छमाही के 14.3 तिमाही से घटकर 2026 की पहली छमाही में 13.5 तिमाही रह गई। इससे संकेत मिलता है कि पुराना स्टॉक धीरे-धीरे कम हो रहा है और खरीदार निर्माण पूरा होने के करीब पहुंच चुकी संपत्तियों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
हालांकि, मौजूदा इन्वेंट्री को बेचने में लगने वाला अनुमानित समय यानी क्वार्टर्स टू सेल (QTS) बढ़कर 6.0 तिमाही हो गया। 2025 के अंत में यह 5.8 तिमाही था। रिपोर्ट के अनुसार, बिक्री लगभग स्थिर रहने के बीच इन्वेंट्री बढ़ने से QTS में यह वृद्धि हुई है।
अहमदाबाद में सबसे ज्यादा, पुणे में सबसे कम QTS
शहरों की बात करें तो अहमदाबाद में बिना बिके मकानों को बेचने में सबसे अधिक समय लगने का अनुमान है। यहां QTS 8.1 तिमाही रहा। इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) 7.6 तिमाही के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
वहीं, पुणे में QTS सबसे कम 4.0 तिमाही रहा, जो अपेक्षाकृत बेहतर बिक्री और मांग का संकेत है। चेन्नई में यह आंकड़ा 4.5 तिमाही रहा।
2 से 5 करोड़ रुपये के मकानों में मांग कायम
रिपोर्ट में 2 से 5 करोड़ रुपये की श्रेणी को खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है। इस श्रेणी में बिना बिके मकानों की संख्या भले ही 43 प्रतिशत बढ़ी हो, लेकिन इसी अवधि में बिक्री में 19 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इस कारण इस श्रेणी का QTS 4.4 तिमाही रहा।
इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा कीमतों पर महंगे मकानों की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है और बिक्री की रफ्तार काफी हद तक नई आपूर्ति के साथ बनी हुई है। हालांकि, इन्वेंट्री के लगातार बढ़ने पर नजर रखना जरूरी होगा।
अल्ट्रा-लग्जरी बाजार में अधिक समय
20 से 50 करोड़ रुपये कीमत वाले मकानों की QTS 14.2 तिमाही रही, जबकि 50 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले मकानों के लिए यह 9.7 तिमाही दर्ज की गई।
नाइट फ्रैंक ने हालांकि इन आंकड़ों की व्याख्या सावधानी से करने की सलाह दी है। इसकी वजह यह है कि इन दोनों श्रेणियों में कुल उपलब्ध बिना बिका स्टॉक करीब 2,081 इकाइयों का ही है। ऐसे में किसी एक बड़ी परियोजना के पूरा होने या कुछ बड़े सौदों का इन आंकड़ों पर अपेक्षाकृत ज्यादा असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारतीय आवासीय बाजार में मांग बनी हुई है, लेकिन बाजार का संतुलन अब कीमतों के आधार पर अलग-अलग दिखाई दे रहा है। जहां किफायती और मध्यम कीमत वाले मकानों का स्टॉक घट रहा है, वहीं प्रीमियम और लग्जरी घरों की बढ़ती इन्वेंट्री डेवलपर्स के लिए आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है।







