AI क्रांति से बदलेगा बिजली का ढांचा, 2030 तक 5 अरब डॉलर के बाजार की उम्मीद

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डेस्क : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच डेटा सेंटर में बिजली की खपत और कुशल पावर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ रही है। इसी के चलते 800-वोल्ट डायरेक्ट करंट (800VDC) तकनीक सॉलिड-स्टेट ट्रांसफॉर्मर के लिए वर्ष 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक का बाजार अवसर पैदा कर सकती है। गोल्डमैन सैक्स की एक शोध रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 में 800V GPU तकनीक का इस्तेमाल करने वाले डेटा सेंटर की लगभग 10 गीगावाट (GW) नई क्षमता जुड़ सकती है। यह उस वर्ष तक डेटा सेंटर की कुल स्थापित क्षमता का करीब 6 प्रतिशत और नई क्षमता में होने वाली बढ़ोतरी का लगभग 60 प्रतिशत होगी।

AI के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग में उछाल

AI सिस्टम की बढ़ती कंप्यूटिंग जरूरतों के कारण डेटा सेंटर में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वर रैक की बिजली की जरूरत पहले जहां कुछ दसियों किलोवाट तक होती थी, वहीं अब यह एक मेगावाट से भी अधिक हो सकती है। इससे पारंपरिक बिजली वितरण प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है।

800VDC तकनीक अपनाने से बिजली की दक्षता में 5 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है। इसके अलावा, तांबे की जरूरत में 45 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। यह तकनीक बिजली की मांग में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में भी डेटा सेंटर की मदद कर सकती है।

2027 से शुरू हो सकता है व्यावसायिक इस्तेमाल

रिपोर्ट के अनुसार, इस तकनीक का व्यावसायिक इस्तेमाल 2027 की शुरुआत में पावर साइडकार सिस्टम के साथ शुरू होने की उम्मीद है। ये सिस्टम मौजूदा अल्टरनेटिंग करंट (AC) इंफ्रास्ट्रक्चर को हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (DC) व्यवस्था के साथ काम करने में सक्षम बनाते हैं।

इसके बाद 2027 के अंतिम महीनों और 2028 की शुरुआत में सॉलिड-स्टेट ट्रांसफॉर्मर तथा पूरी तरह एकीकृत 800VDC सिस्टम के इस्तेमाल में तेजी आने की संभावना है।

इस बदलाव से सर्किट सुरक्षा, ऊर्जा भंडारण, बिजली रूपांतरण और कूलिंग सिस्टम से जुड़े उद्योगों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि केवल सॉलिड-स्टेट सर्किट ब्रेकर का बाजार ही 8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।

कूलिंग सिस्टम और विशेष केबल की बढ़ेगी अहमियत

AI डेटा सेंटर में हाई-डेंसिटी कंप्यूटिंग सिस्टम अधिक गर्मी पैदा करते हैं। ऐसे में लिक्विड कूलिंग तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। डेटा सेंटर को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए बेहतर कूलिंग समाधान की जरूरत बढ़ने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में केबल निर्माताओं के लिए भी संभावनाएं जताई गई हैं। नई बिजली व्यवस्था से कुल तांबे की खपत कम हो सकती है, लेकिन विशेष प्रकार के उच्च-मूल्य वाले केबल और हाई-टेम्परेचर सुपरकंडक्टिंग तकनीक से जुड़े उत्पादों की मांग कंपनियों के मुनाफे को सहारा दे सकती है।

गोल्डमैन सैक्स ने फ्रांस की केबल निर्माता कंपनी नेक्सांस (Nexans) को इस बदलाव से संभावित लाभ पाने वाली कंपनियों में शामिल किया है।

बाजार अभी शुरुआती चरण में

हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 800VDC तकनीक से जुड़ा बाजार अभी शुरुआती दौर में है। तकनीक के परीक्षण, पायलट परियोजनाओं और बड़े स्तर पर व्यावसायिक इस्तेमाल के दौरान इसकी स्वीकार्यता की गति तथा बाजार के आकार से जुड़े अनुमान बदल सकते हैं।

कुल मिलाकर, AI के विस्तार से डेटा सेंटर में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था बदलने की संभावना है। इससे सॉलिड-स्टेट ट्रांसफॉर्मर के साथ-साथ बिजली सुरक्षा उपकरणों, ऊर्जा भंडारण, पावर कन्वर्जन और कूलिंग तकनीक से जुड़े उद्योगों के लिए भी नए व्यावसायिक अवसर खुल सकते हैं।