डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त करना, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पुनः खोलना तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू करना है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। ईरानी राष्ट्रपति की ओर से भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। प्रारंभिक 60 दिनों तक ईरान बिना किसी शुल्क के जहाजों के आवागमन की सुविधा प्रदान करेगा, जबकि अमेरिका अपने नौसैनिक प्रतिबंधों और संबंधित अवरोधों को चरणबद्ध तरीके से हटाना शुरू करेगा।
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह समझौता ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार के मुद्दे को संबोधित करने के साथ-साथ आर्थिक राहत और प्रतिबंधों में क्रमिक ढील देने का ढांचा तैयार करता है। उनके अनुसार, ईरान द्वारा समझौते के प्रावधानों का पालन किए जाने पर अमेरिका आर्थिक और प्रतिबंध संबंधी राहत बढ़ाएगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि ओमान सहित कई देशों के साथ इस विषय पर लंबे समय से परामर्श चल रहा था। उन्होंने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित किया जाएगा, जबकि इस क्षेत्र पर ईरान की संप्रभुता और अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।
14 सूत्रीय समझौते में तत्काल और स्थायी सैन्य गतिविधियों को रोकने का प्रावधान शामिल है। इसमें लेबनान से जुड़े संघर्षों को समाप्त करने और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर दोनों पक्षों की सहमति से इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकेगा।
समझौते में ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने, विदेशों में जमे ईरानी धन को मुक्त करने, ईरानी तेल निर्यात के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा विशेष छूट देने तथा ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के अमेरिकी समर्थित कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है।
ईरान ने समझौते में पुनः आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित या प्राप्त नहीं करेगा। साथ ही, उसके संवर्धित यूरेनियम भंडार के भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में चर्चा की जाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो मध्य पूर्व में तनाव कम होने, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिरता मिलने और अमेरिका-ईरान संबंधों में नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।


