बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप साबित नहीं, महिला पहलवानों के मामले में कोर्ट से बड़ी राहत

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नई दिल्ली : भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से कथित छेड़छाड़ के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए मामले में बृजभूषण शरण सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को आरोपमुक्त कर दिया।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने मामले में अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने इससे पहले मई 2024 में सिंह के खिलाफ आपराधिक धमकी से जुड़े आरोप तय करने का आदेश दिया था। हालांकि, छह महिला पहलवानों में से एक की शिकायत से जुड़े मामले में सिंह को पहले ही आरोपमुक्त किया जा चुका था।

किन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला

दिल्ली पुलिस ने मामले में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354ए, 354डी और 506 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग, यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी से संबंधित आरोप शामिल थे।

यह मामला 2023 में देशभर में चर्चा में आया था, जब कई शीर्ष महिला पहलवानों ने तत्कालीन डब्ल्यूएफआई प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न सहित गंभीर आरोप लगाए थे। मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन भी हुआ था।

2024 के लोकसभा चुनाव में नहीं मिला था टिकट

मामला सामने आने के बाद भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह को कैसरगंज सीट से टिकट नहीं दिया था। पार्टी ने उनकी जगह उनके बेटे को उम्मीदवार बनाया था। अब अदालत से आरोपमुक्त होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं।

अदालत का यह फैसला बृजभूषण शरण सिंह के लिए कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। वहीं, यह मामला लंबे समय तक भारतीय खेल प्रशासन, महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और कुश्ती महासंघ की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय बहस का केंद्र रहा है।