डेस्क : पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने वर्ष २०२६ में हुए विधानसभा चुनाव को रद्द कर राज्य में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी तथा आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले की मतदाता सूची के आधार पर नए सिरे से चुनाव कराया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग ने मिलकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को प्रभावित किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर पद से इस्तीफा देने का भी दबाव बनाया।
७९ लाख नाम हटाने का मुद्दा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी विवाद सामने आया है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष २०२४ के लोकसभा चुनाव और वर्ष २०२६ के विधानसभा चुनाव के बीच पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से करीब ७९ लाख नाम हटाए गए। ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के अलावा उन राज्यों में भी दोबारा चुनाव कराने की मांग की, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद चुनाव हुए और भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली।
निर्वाचन आयोग ने आरोपों पर रखा अपना पक्ष
ममता बनर्जी की मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब निर्वाचन आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेदों की एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन खबरों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आयोग के भीतर सुझाव, टिप्पणियां और आपत्तियां दर्ज होना निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण सहित पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी प्रमुख फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक बुलाने और आगे की रणनीति तय करने की भी बात कही।








