बेटी के अधिकारों पर अहम टिप्पणी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया समानता का संदेश


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि विवाह के बाद भी बेटी का अपने माता-पिता और परिवार से संबंध समाप्त नहीं होता। अदालत ने स्पष्ट किया कि “विवाहित बेटी भी परिवार का हिस्सा बनी रहती है” और उसे परिवार से अलग नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें पारिवारिक और कानूनी अधिकारों को लेकर प्रश्न उठे थे। अदालत ने कहा कि बेटी के अधिकार केवल विवाह के आधार पर समाप्त नहीं हो जाते, बल्कि वह अपने माता-पिता की वैध संतान के रूप में हमेशा परिवार का हिस्सा रहती है।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय समाज में लंबे समय से चली आ रही यह धारणा कि विवाह के बाद बेटी “पराई” हो जाती है, आधुनिक संवैधानिक मूल्यों और समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।

अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी दोहराया कि कानून के तहत बेटियों को बेटों के समान अधिकार प्राप्त हैं, चाहे वह संपत्ति से जुड़े मामले हों या पारिवारिक संबंधों से संबंधित अधिकार।

यह टिप्पणी महिलाओं के अधिकारों और पारिवारिक संबंधों की व्याख्या को लेकर न्यायिक दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

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