बेटियों ने मोबाइल स्क्रीन पर देखी पिता की अंतिम विदाई, संस्कार के लिए भेजे 5100 रुपये

0

सोनीपत : हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम से सामने आई घटना ने रिश्तों और बदलते पारिवारिक जीवन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां रहने वाले 70 वर्षीय पूर्व कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। पिता की मौत की सूचना उनकी तीनों बेटियों को दी गई, लेकिन वे अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सोनीपत नहीं पहुंच सकीं। बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए पिता की अंतिम विदाई देखी। एक बेटी ने अंतिम संस्कार के लिए 5100 रुपये ऑनलाइन भेजे।

मूल रूप से मुंबई के रहने वाले शिवचरण गुप्ता अपनी पत्नी मीना के साथ पिछले करीब डेढ़ वर्ष से सोनीपत के वेस्ट राम नगर स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे थे। कुछ समय पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो चुका था। वृद्धाश्रम संचालक के अनुसार, शिवचरण की तबीयत पिछले करीब 20 दिनों से खराब थी। उनकी बेटियों को पिता की तबीयत बिगड़ने की जानकारी पहले ही दे दी गई थी और उनसे सोनीपत आने का आग्रह भी किया गया था।

बीमारी की जानकारी के बावजूद नहीं पहुंचीं बेटियां

वृद्धाश्रम संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, शिवचरण की तबीयत खराब होने की जानकारी उनकी बेटियों को करीब 20 दिन पहले दे दी गई थी। प्रबंधन ने उनसे पिता से मिलने के लिए आने का आग्रह भी किया था। हालांकि, उनके अनुसार बेटियां नहीं पहुंचीं। बीमारी के दौरान बेटियों के फोन आने भी बंद हो गए थे।

मंगलवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे शिवचरण का निधन हो गया। इसके बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनकी तीनों बेटियों से संपर्क कर पिता के निधन की सूचना दी। प्रबंधन ने यह भी कहा कि यदि वे सोनीपत पहुंचना चाहती हैं तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया उनके आने तक रोकी जा सकती है।

हालांकि बेटियों ने समय की कमी का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई।

एक बेटी नेपाल, दूसरी आजमगढ़ और तीसरी मुंबई में

रिपोर्ट के अनुसार शिवचरण गुप्ता की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी अनीता नेपाल में शिक्षिका हैं, जबकि दूसरी बेटी निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं। सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती हैं। तीनों बेटियां शादीशुदा हैं और अपने-अपने परिवार के साथ रह रही हैं।

पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सोनीपत नहीं पहुंच पाने के बाद अनीता ने ऑनलाइन 5100 रुपये भेजे और वृद्धाश्रम प्रबंधन से पिता का अंतिम संस्कार रीति-रिवाज के अनुसार कराने का अनुरोध किया।

मोबाइल स्क्रीन पर देखी पिता की अंतिम विदाई

तीनों बेटियों ने अलग-अलग शहरों में रहकर वीडियो कॉल के जरिए पिता के अंतिम संस्कार को देखा। इस दौरान अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो भी बेटियों को भेजे गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, बेटियों ने पहले पिता की अस्थियों को सुरक्षित रखने के लिए कहा था, ताकि बाद में वे आकर उन्हें ले सकें। हालांकि बाद में उन्होंने फिर फोन कर कहा कि उनके पास सोनीपत आने का समय नहीं है। इसके बाद उन्होंने वृद्धाश्रम प्रबंधन से ही अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने का अनुरोध किया।

बेटे नहीं थे, बेटियों को पढ़ाकर बनाया काबिल

शिवचरण गुप्ता का कोई बेटा नहीं था। उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को बेटों से बढ़कर माना और उन्हें अच्छी शिक्षा देकर अपने पैरों पर खड़ा किया। तीनों बेटियां आज अपने-अपने क्षेत्रों में जीवन बिता रही हैं। लेकिन पिता की मृत्यु के बाद अंतिम विदाई के लिए उनका मौके पर मौजूद न होना इस घटना को और मार्मिक बना गया।

वृद्धाश्रम प्रबंधन के मुताबिक, शिवचरण अपनी पत्नी के निधन के बाद अकेले पड़ गए थे और पिछले डेढ़ साल से वृद्धाश्रम में रह रहे थे। लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी बेटियों ने दूर रहकर वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम संस्कार देखा।

यह घटना एक बार फिर बुजुर्ग माता-पिता, बदलती पारिवारिक परिस्थितियों और दूर होते रिश्तों को लेकर सवाल खड़े करती है।