भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर फंसी बात, निर्मला सीतारमण ने कहा- गुंजाइश सीमित

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डेस्क : भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल ऐसे दौर में पहुंच गई है, जहां दोनों पक्षों के लिए आगे और रियायत देना या लेना बेहद मुश्किल हो सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता एक तरह के ‘ठहराव’ पर पहुंच गई है, हालांकि बातचीत अभी जारी है।

सीतारमण ने नई दिल्ली में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में कहा कि यह समझौता काफी कठिन और गहन बातचीत के बाद तैयार हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के पास अब समझौते के लिए अतिरिक्त गुंजाइश सीमित रह गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि बातचीत के लिए कोई रास्ता बचता है तो दोनों पक्ष उस पर आगे बढ़ सकते हैं।

अमेरिका व्यापार घाटा कम करना चाहता है

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। ऐसे में अमेरिका स्वाभाविक रूप से अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पिछले वर्षों में हुए व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए कदम उठाना चाहता है।

भारत और अमेरिका फरवरी 2025 से व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों का लक्ष्य व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ बाजार तक पहुंच से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान करना है। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा भी तैयार की थी, लेकिन व्यापक समझौते पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।

शुल्क को लेकर भी मतभेद

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ऐसे समय में आगे बढ़ रही है, जब दोनों देशों के बीच शुल्क और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी पक्ष भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने पर जोर दे रहा है, जबकि भारत अपने हितों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ बेहतर बाजार पहुंच चाहता है।

सीतारमण ने व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए शुल्कों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि व्यापार संबंधों में शुल्क का इस्तेमाल केवल बातचीत के एक साधन तक सीमित नहीं रह गया है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन वित्त मंत्री की ताजा टिप्पणी से संकेत मिलता है कि समझौते के शेष मुद्दों पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर भी पिछले सप्ताह कह चुके हैं कि फिलहाल समझौता तुरंत होने की स्थिति में नहीं है।