भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे एक दशक के सुधार: निर्मला सीतारमण

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नई दिल्ली :  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती पिछले एक दशक में राजकोषीय अनुशासन, बुनियादी ढांचे के विस्तार, बैंकिंग सुधार, अंतिम छोर तक योजनाओं की पहुंच और लगातार किए गए सुधारों के जरिए तैयार हुई है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत को रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी पर और अधिक ध्यान देना होगा।

पांचवें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक लचीलापन का अर्थ झटकों को सहने के बावजूद विकास की दिशा बनाए रखना और भविष्य में आने वाले संकटों से निपटने के लिए पर्याप्त नीतिगत गुंजाइश बनाए रखना है।

सीतारमण ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण उन परिस्थितियों में भी दिखाई देता है, जो संकट के दौरान पैदा नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई का गंभीर चक्र नहीं बना, ईंधन केंद्रों पर लंबी कतारें नहीं लगीं, बैंकिंग क्षेत्र में व्यापक तनाव सामने नहीं आया और राजकोषीय सुधार किसी बाहरी दबाव के कारण मजबूरी में नहीं करना पड़ा।

‘अर्थशास्त्र’ का किया उल्लेख

वित्त मंत्री ने कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ का उल्लेख करते हुए ‘कोषः पूर्वः सर्वारम्भाः’ सिद्धांत की चर्चा की। उन्होंने कहा कि मजबूत सार्वजनिक वित्त व्यवस्था सरकार को आर्थिक परिस्थितियों के खराब होने पर आवश्यक कदम उठाने की स्वतंत्रता देती है।

उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले चार वर्षों के विभिन्न आर्थिक झटकों का सामना अपनी बुनियादी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखते हुए किया है। वित्त मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.82 प्रतिशत, पहली तिमाही में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 0.5 प्रतिशत और विदेशी मुद्रा भंडार करीब 766 अरब डॉलर रहा।

जनधन, आधार और डीबीटी को बताया अहम आधार

सीतारमण ने 2014 के बाद आर्थिक मजबूती की नींव तैयार करने वाले कदमों का उल्लेख करते हुए जनधन-आधार-मोबाइल व्यवस्था और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अब तक 52 करोड़ से अधिक बिना जमानत वाले ऋण मंजूर किए जा चुके हैं। बैंकिंग क्षेत्र में किए गए सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 तक के एक वर्ष में गैर-खाद्य ऋण में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

बुनियादी ढांचे पर भी जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत व्यय 12.22 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। वर्ष 2014 के बाद देश के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में करीब 61 प्रतिशत विस्तार हुआ है, जबकि परिचालन वाले हवाई अड्डों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है।

आगे की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए सीतारमण ने रणनीतिक संसाधन सुरक्षा, खुले और पूर्वानुमेय वैश्विक व्यापार, कौशल विकास तथा अनुसंधान एवं नवाचार में निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत को किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के विकास जैसी पहलों को आगे बढ़ाना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक मजबूती कोई एक बार पूरा होने वाली प्रक्रिया नहीं है। भारत को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी बुनियाद को लगातार मजबूत करना होगा, ताकि उत्पादकता बढ़े, रोजगार के अवसर बेहतर हों और विकास का लाभ व्यापक स्तर तक पहुंच सके।