ब्रिटानिया के ‘100% होल व्हीट’ दावे पर सरकार का चाबुक, ₹1 लाख का जुर्माना

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नई दिल्ली :  ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर अपनी ब्रेड को ‘100 प्रतिशत होल व्हीट ब्रेड’ बताकर प्रचारित करने के मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने कंपनी के इस दावे को भ्रामक विज्ञापन मानते हुए संबंधित प्रचार सामग्री बंद करने और निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

मामले के अनुसार, ब्रिटानिया की ब्रेड में साबुत गेहूं के आटे की मात्रा 62 प्रतिशत पाई गई, जबकि उत्पाद का प्रचार 100 प्रतिशत होल व्हीट ब्रेड के रूप में किया जा रहा था। सीसीपीए ने माना कि इस तरह के दावे से उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद की वास्तविक संरचना को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।

कंपनी की दलील नहीं मानी

कंपनी ने अपने पक्ष में कहा कि ‘100 प्रतिशत’ का आशय ब्रेड में इस्तेमाल किए गए गेहूं के आटे से था और उत्पाद में मैदा का इस्तेमाल नहीं किया गया था। हालांकि, प्राधिकरण ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। सीसीपीए के अनुसार, उपभोक्ता ‘100 प्रतिशत होल व्हीट’ जैसे दावे को पूरे उत्पाद की संरचना से जोड़कर समझ सकते हैं। पैकेट पर छोटे अक्षरों में दी गई जानकारी प्रमुख दावे से उत्पन्न भ्रम को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

75 प्रतिशत की सीमा का भी मामला

प्राधिकरण ने ‘होल व्हीट ब्रेड’ नाम के इस्तेमाल से जुड़े खाद्य मानकों का भी उल्लेख किया। मामले में साबुत गेहूं के आटे की न्यूनतम 75 प्रतिशत मात्रा की सीमा का संदर्भ दिया गया। इसके मुकाबले उत्पाद में इसकी मात्रा 62 प्रतिशत होने के कारण ब्रेड को इस नाम से प्रचारित करने पर सवाल उठाए गए।

सीसीपीए ने विज्ञापनों में पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े दावों की भी जांच की। प्राधिकरण की कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद की सामग्री और गुणवत्ता के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराना है।

इस मामले ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, उपभोक्ताओं को खाद्य सामग्री खरीदते समय आकर्षक विज्ञापनों के साथ पैकेट पर दी गई सामग्री सूची और पोषण संबंधी जानकारी भी ध्यान से पढ़नी चाहिए।