चुनावी तैयारी में मायावती का बड़ा फेरबदल, चार राज्यों में बदली जिम्मेदारियां

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लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को फिर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहे और अब उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा।

मायावती के इस फैसले को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब बसपा आगामी चुनावों को देखते हुए अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर कई बदलाव किए हैं और विभिन्न राज्यों में जिम्मेदारियां भी बदली गई हैं।

अशोक सिद्धार्थ पर मायावती का सख्त रुख

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को लेकर स्पष्ट किया कि पार्टी में अनुशासन और संगठन के हित से समझौता नहीं किया जाएगा। इससे पहले भी सिद्धार्थ को बसपा से निष्कासित किया जा चुका है। इस बार मायावती ने संकेत दिया है कि उनकी वापसी की कोई संभावना नहीं होगी।

अशोक सिद्धार्थ को कभी मायावती का करीबी माना जाता था। वह आकाश आनंद के ससुर हैं और लंबे समय तक पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी मायावती ने उन्हें पार्टी से निष्कासित किया था। उन पर गुटबाजी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे।

रणधीर सिंह बेनीवाल भी हटाए गए

बसपा प्रमुख ने संगठनात्मक कार्रवाई के तहत रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से हटा दिया है। मायावती के इस कदम को संगठन में अनुशासन बनाए रखने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले पार्टी को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

चुनावों से पहले संगठन पर जोर

बसपा लगातार अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मायावती का ताजा फेरबदल इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व आगामी चुनावों से पहले संगठन में सक्रिय और भरोसेमंद नेताओं को जिम्मेदारी देने पर जोर दे रहा है।

मायावती पहले भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि पार्टी में पद से ज्यादा महत्व संगठन और आंदोलन के प्रति निष्ठा का है। ऐसे में ताजा कार्रवाई को उनके पुराने अनुशासनात्मक रुख की निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है।