डेस्क : दिल्ली में मतदाता सूची से कथित तौर पर गलत तरीके से नाम हटाए जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आयोग से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों को दूर करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस पूरी प्रक्रिया से पैदा हुई अव्यवस्था को ठीक करना चाहिए और प्रभावित मतदाताओं को राहत देनी चाहिए।
कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि दिल्ली के दो मतदान केंद्रों पर कम से कम 100 मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए। आरोप है कि इन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे पंजीकरण वाली श्रेणियों में शामिल किया गया था।
कांग्रेस नेता ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सवाल उठाया कि यदि दो मतदान केंद्रों पर इतनी बड़ी संख्या में कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं, तो व्यापक स्तर पर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की वास्तविक स्थिति क्या होगी। उनके अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलती से न हटे।
चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर घेरा
जयराम रमेश ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की ओर से किए जाने वाले सत्यापन और मतदाताओं को सूचना देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, उनमें से कुछ को इसकी जानकारी तक नहीं मिली।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने आयोग से कथित रूप से प्रभावित मतदाताओं की पहचान करने, शिकायतों की जांच कराने और पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की।
SIR को लेकर बढ़ सकती है राजनीतिक टकराव की स्थिति
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दल पहले भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। अब दिल्ली में नाम हटाए जाने के आरोपों ने इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
जयराम रमेश ने SIR प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और कथित अनियमितताओं को दूर करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गलती नागरिकों के मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल, इन आरोपों पर चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित शिकायतों की जांच और आयोग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
सियासी सवाल: मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा अब इस राजनीतिक विवाद के केंद्र में है।









