डेस्क : देश में बढ़ती ड्रग्स तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नशीले पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए सभी विशेषज्ञ एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। अदालत ने इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।
सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि ड्रग्स तस्करी बेहद गंभीर समस्या है और इससे निपटने के लिए एजेंसियों के साझा प्रयास जरूरी हैं। याचिका में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की समयबद्ध जांच और सुनवाई के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
2025 में 53 फीसदी बढ़े ड्रग्स के मामले
याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में ड्रग्स से जुड़े मामलों में 53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और करीब 1,240 टन नशीले पदार्थ जब्त किए गए। याचिका के मुताबिक, नशीली दवाओं की लत का असर परिवारों और समाज पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है।
सीजेआई सूर्यकांत ने विदेशों से पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाया। वहीं न्यायमूर्ति बागची ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और सीमा पार से होने वाली तस्करी के खतरे पर चिंता जताई।
समान जांच प्रक्रिया की मांग
याचिका में एनडीपीएस मामलों की जांच के लिए देशभर में समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने, फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट के लिए समय सीमा तय करने और तलाशी, जब्ती तथा नमूना लेने की प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं वीडियोग्राफी अनिवार्य करने की मांग की गई है।
इसके अलावा तस्करों की संपत्तियों की समयबद्ध पहचान और जब्ती, विशेष अदालतों के गठन तथा नए मनोप्रभावी पदार्थों की पहचान के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग भी की गई है।
याचिका में कहा गया है कि ड्रग्स तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवारों, संगठित अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा तक पहुंचता है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।








