नई दिल्ली : केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि बदलते आर्थिक परिदृश्य और तकनीकी बदलावों के अनुरूप देश की श्रम व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को लगातार विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ऑटोमेशन और रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकें रोजगार के क्षेत्र में व्यापक अवसर पैदा कर रही हैं, ऐसे में युवाओं को नए दौर के कौशल से लैस करना जरूरी है।
मांडविया सोमवार को नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और एम्प्लॉयर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईएफआई) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय औद्योगिक संबंध एवं श्रम सम्मेलन और पुरस्कार 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन की थीम ‘एआई युग में औद्योगिक संबंधों और कार्यस्थल भागीदारी का पुनर्गठन’ रखी गई थी।
मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2026 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल का प्रशिक्षण देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि एआई और अन्य उभरती तकनीकों के दौर में युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
केंद्रीय मंत्री ने देश में सामाजिक सुरक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2015 में जहां सामाजिक सुरक्षा का दायरा आबादी के करीब 19 प्रतिशत तक सीमित था, वहीं अब यह बढ़कर 101 करोड़ लोगों यानी करीब 68 प्रतिशत आबादी तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस विस्तार को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने भी मान्यता दी है।
मांडविया ने कहा कि उद्योग समर्थक नीतियों को श्रमिक विरोधी और श्रमिक हितों की नीतियों को उद्योग विरोधी मानने की पारंपरिक सोच में बदलाव की जरूरत है। उद्योग और श्रमिकों को एक-दूसरे के विरोधी के बजाय राष्ट्र निर्माण में साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने श्रम संहिताओं को लेकर मंत्रालय की ओर से शुरू किए जा रहे जागरूकता अभियान ‘श्रम संवाद’ की भी घोषणा की। यह अभियान सोमवार से शुरू होकर अगले 90 दिनों तक चलेगा। इसके तहत देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 316 जिलों में औद्योगिक क्लस्टरों को शामिल किया जाएगा।
मांडविया ने औद्योगिक संबंधों को मजबूत करने के लिए सभी पक्षों के बीच लगातार संवाद और परामर्श को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा, “जहां संवाद है, वहां समाधान है।” उन्होंने उद्योग और श्रमिकों के हितों के बीच संतुलन कायम करने के लिए बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने और उन्हें अपनाने पर भी जोर दिया।
भारत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए मांडविया ने कहा कि देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017 से 2023 के बीच अर्थव्यवस्था में एक प्रतिशत की वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पहले यह अनुपात 0.008 प्रतिशत था।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार, उद्योग और श्रमिकों समेत सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। इसके केंद्र में टिकाऊ आर्थिक विकास, रोजगार के बढ़ते अवसर और श्रमिकों के लिए सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां होनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ‘एम्प्लॉयर गाइड अंडर न्यू लेबर कोड्स फ्रेमवर्क: फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट इन इंडिया’ नामक रिपोर्ट का भी विमोचन किया।
सम्मेलन में सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के अध्यक्ष पुनीत कौरा, सीआईआई की राष्ट्रीय औद्योगिक संबंध एवं श्रम समिति के सह-अध्यक्ष एस. हर्षवर्धन चितले, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के क्षेत्रीय साझेदारी विकास एवं संसाधन जुटाने के उप निदेशक एवं वरिष्ठ सलाहकार ओक्टावियंतो पासारिबू समेत उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधिकारी मौजूद रहे।
सम्मेलन में तकनीकी बदलावों और बदलते रोजगार परिदृश्य के बीच औद्योगिक संबंधों एवं कार्यस्थल के भविष्य पर उद्योग और श्रम क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच विचार-विमर्श किया जाएगा।








