डेस्क : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को इसे ‘चौंकाने वाली स्थिति’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक मतदान अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और चुनावी व्यवस्था में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।
एएनआई से बातचीत में तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि नागरिकों का मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी गारंटी है और इसे किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
थरूर ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने कई मौकों पर अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों को दरकिनार करते हुए निर्णय लिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनावी सॉफ्टवेयर में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनके कारण चुनाव अधिकारियों के लिए हटाए गए मतदाताओं को बहाल करना संभव नहीं रह गया है। थरूर ने चुनावी प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया।
कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूचियों के एसआईआर को लेकर विरोध जता रही है और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगा रही है। थरूर ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक 29 सितंबर को होगी और विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष की कोशिश एक मजबूत और साझा रुख सामने रखने की है।
थरूर ने यह भी कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। उन्होंने भाजपा नेताओं और मतदाताओं से भी जवाबदेह चुनावी व्यवस्था की मांग का समर्थन करने की अपील की।
इस बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के विपक्ष के आरोपों संबंधी बयान पर पलटवार किया। वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग को लेकर उठाए गए सवालों की पुष्टि कांग्रेस नेताओं ने नहीं, बल्कि दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों ने की है।
विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर सहित चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों और आदेशों पर 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में फॉर्म-6, मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को संस्थागत मतभेद या अंतिम फैसलों पर असहमति के रूप में पेश किए जाने को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, मसौदा तैयार करने के दौरान अधिकारियों की ओर से उठाए गए प्रशासनिक सवाल, सुझाव और इनपुट सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने कहा है कि एसआईआर सहित सभी फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।








