ई-20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, भ्रष्टाचार के लगाए आरोप

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डेस्क : ई-20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष के हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं। अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने का ऐलान किया है। राहुल गांधी ने एक वीडियो साझा करते हुए ई-20 पेट्रोल की नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि ई-20 पेट्रोल का मुद्दा बहुत बड़ा है। उन्होंने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आम तौर पर किसी मामले में कहा जाता है कि ‘दाल में कुछ काला है’, लेकिन यहां स्थिति इससे भी आगे है। उनके अनुसार, “दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।” उन्होंने कहा कि इस मामले में घटनाक्रम की एक बड़ी कड़ी दिखाई देती है और इसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

जल्द बड़े स्तर पर अभियान चलाने का ऐलान

राहुल गांधी ने कहा कि लोगों को इस मुद्दे को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस जल्द ही ई-20 पेट्रोल के मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएगी और इसके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस विषय को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसके प्रभावों को जनता के सामने रखा जाएगा। राहुल गांधी के मुताबिक, ई-20 पेट्रोल से जुड़ी समस्याओं का असर सीधे आम वाहन चालकों पर पड़ रहा है।

गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का दावा

राहुल गांधी ने ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों पर पड़ने वाले कथित प्रभाव का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि इससे लोगों की कार, मोटरसाइकिल और स्कूटर खराब हो रहे हैं। उनका कहना है कि वाहनों से जुड़ी इन समस्याओं के कारण लोगों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है और इसका आर्थिक बोझ सीधे उनकी जेब पर पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर लोगों के वाहनों पर इसका असर पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जनता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी को आधार बनाकर उन्होंने सरकार की ई-20 नीति पर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है ई-20 पेट्रोल?

ई-20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें पेट्रोल के साथ २० प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति का उद्देश्य पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

हालांकि, ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर वाहन चालकों के बीच भी कई तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं। खास तौर पर पुराने वाहनों में इसके इस्तेमाल, ईंधन की खपत और वाहन के रखरखाव से जुड़े सवालों पर बहस जारी है।

सरकार और विपक्ष के दावों में अंतर

ई-20 पेट्रोल को लेकर सरकार और विपक्ष की राय अलग-अलग है। विपक्ष लगातार इसके प्रभावों पर सवाल उठा रहा है और लोगों को पेट्रोल के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताती रही है।

हाल में सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि २० प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए अभी कोई अलग नीति नहीं बनाई गई है। साथ ही सरकार ने ई-20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान पहुंचने की चिंताओं को भी खारिज किया है।

ई-20 पर बढ़ रही सियासी गर्मी

ई-20 पेट्रोल को लेकर पिछले कुछ दिनों में राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। आम आदमी पार्टी भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध चुकी है और पेट्रोल के विकल्प को लेकर अपनी मांग सामने रख चुकी है। पंजाब विधानसभा में भी केंद्र की ई-20 नीति के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने की खबर सामने आई है।

ऐसे समय में राहुल गांधी का इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने का ऐलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में ई-20 पेट्रोल का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकता है।

राहुल गांधी के आरोपों के बाद अब निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रस्तावित अभियान को किस रूप में आगे बढ़ाती है और सरकार की ओर से ई-20 पेट्रोल के फायदे तथा इससे जुड़े आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है।