टी-20 के तूफान के बाद लाल गेंद पर वैभव सूर्यवंशी की अग्निपरीक्षा

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स्पोर्ट्स डेस्क : महज 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके वैभव सूर्यवंशी अब एक बार फिर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनने वाले हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट से फिलहाल दूर चल रहे वैभव अब लाल गेंद के क्रिकेट में अपना दम दिखाने की तैयारी में हैं। आगामी दलीप ट्रॉफी में 23 अगस्त से वह मैदान पर नजर आएंगे। इस बार उनकी बल्लेबाजी की असली परीक्षा लंबे प्रारूप में होगी।

वैभव सूर्यवंशी को दलीप ट्रॉफी में पूर्वी क्षेत्र की टीम का उपकप्तान बनाया गया है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से तहलका मचा चुके वैभव अब लाल गेंद के खेल को और बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। वह नागपुर के पास तलेगांव स्थित राजस्थान रॉयल्स अकादमी में सहायक प्रशिक्षक विक्रम राठौर के मार्गदर्शन में लाल गेंद के क्रिकेट की तैयारी कर रहे हैं।

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अभी तक ऐसा रहा प्रदर्शन

वैभव ने महज 12 साल और 284 दिन की उम्र में 5 जनवरी 2024 को पटना में मुंबई के खिलाफ बिहार की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था। वह रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हैं और 1986 के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी बने थे।

अब तक वैभव ने आठ प्रथम श्रेणी मुकाबलों की 12 पारियों में 207 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 17.25 रहा है, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 93 रन है। उनके नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अभी एक ही अर्धशतक है।

उनकी बल्लेबाजी की खास बात यह है कि लाल गेंद के क्रिकेट में भी उनका स्ट्राइक रेट करीब 90 का है, जो उनके आक्रामक अंदाज को दर्शाता है।

शतक से सिर्फ सात रन दूर रह गए थे वैभव

वैभव का प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर 93 रन है। उन्होंने नवंबर 2025 में पटना में मेघालय के खिलाफ यह पारी खेली थी। उन्होंने महज 67 गेंदों में 93 रन बनाए थे। इस पारी में वैभव ने नौ चौके और चार छक्के लगाए थे।

इस पारी के दौरान वह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का रिकॉर्ड बनाने के करीब पहुंच गए थे, लेकिन सात रन से चूक गए। वह ध्रुव पांडोव का 37 साल पुराना रिकॉर्ड नहीं तोड़ सके।

युवा टेस्ट में ज्यादा प्रभावी रहे हैं

प्रथम श्रेणी क्रिकेट की तुलना में वैभव का प्रदर्शन भारत की अंडर-19 युवा टेस्ट टीम के लिए बेहतर रहा है। उन्होंने अब तक छह युवा टेस्ट मुकाबलों में 331 रन बनाए हैं और उनका औसत 33.10 रहा है। इस दौरान उनके बल्ले से दो शतक निकले हैं।

वैभव ने सितंबर 2024 में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम के खिलाफ अपने पदार्पण युवा टेस्ट में ही शानदार शतक जड़ा था। उन्होंने महज 58 गेंदों में शतक पूरा किया था। यह किसी भारतीय बल्लेबाज का इस प्रारूप में सबसे तेज शतक था। इसी पारी के साथ वह युवा टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में भी शामिल हुए।

इसके बाद उन्होंने एक और शानदार शतक लगाया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिस्बेन में खेले गए मुकाबले में वैभव ने 86 गेंदों में 113 रन की पारी खेली थी।

ऑस्ट्रेलिया में बल्ला खूब चला

लाल गेंद के क्रिकेट में वैभव का प्रदर्शन अलग-अलग परिस्थितियों में अलग रहा है। ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम के खिलाफ उनका प्रदर्शन विशेष रूप से प्रभावशाली रहा है। ऑस्ट्रेलिया में युवा टेस्ट मुकाबलों में उनका बल्लेबाजी औसत 44.33 रहा है।

वहीं भारत में उनका औसत 36.00 रहा। इंग्लैंड में खेले गए दो युवा टेस्ट मुकाबलों में हालांकि उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और वहां उनका औसत 22.50 रहा। गेंद के अधिक स्विंग होने वाली परिस्थितियों में वैभव के सामने अलग तरह की चुनौती रही है।

अब दलीप ट्रॉफी में होगी असली परीक्षा

वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही तेज बल्लेबाजी और बड़े शॉट लगाने की क्षमता से अपनी अलग पहचान बनाई है। सीमित ओवरों में उनके रिकॉर्ड इस बात की गवाही देते हैं कि उनमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। लेकिन लंबे प्रारूप में धैर्य, तकनीक और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है।

दलीप ट्रॉफी वैभव के लिए इसी लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पूर्वी क्षेत्र की टीम के उपकप्तान के रूप में उनके ऊपर जिम्मेदारी भी होगी और प्रदर्शन का दबाव भी। अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहचान बना चुके वैभव सूर्यवंशी लाल गेंद के क्रिकेट में कितनी तेजी से खुद को ढाल पाते हैं।

टी-20 के तूफानी बल्लेबाज से लंबे प्रारूप के भरोसेमंद बल्लेबाज बनने की राह पर वैभव सूर्यवंशी का अगला पड़ाव दलीप ट्रॉफी होगा।