डेस्क : महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले से जुड़े मुद्दे पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं, इसलिए हाईकोर्ट समानांतर कार्यवाही नहीं करेगा।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने महाराष्ट्र में पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका वंचित बहुजन आघाड़ी की युवा इकाई के अध्यक्ष सागर रमेश गवई ने दायर की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से मांग की गई कि सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई पूरी होने तक महाराष्ट्र की मतदाता सूची से किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाए। याचिकाकर्ता ने पुनरीक्षण प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई।
इस पर अदालत ने तत्काल किसी प्रकार का रोक आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि जब इसी विषय से जुड़े मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं, तब उच्च न्यायालय द्वारा समानांतर आदेश देना उचित नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने अदालत को बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है और अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को निर्धारित है।
अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी है। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संभावित नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।








