डेस्क : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा नजर फिटमेंट फैक्टर पर है, क्योंकि यही कर्मचारी की नई बेसिक सैलरी तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। माना जा रहा है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2, 2.5 या 3 में से किसी स्तर पर तय होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक पे के साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर भत्तों को नहीं बढ़ाता, बल्कि इसके जरिए मौजूदा बेसिक सैलरी को संशोधित किया जाता है। नई बेसिक सैलरी के आधार पर ही HRA समेत अन्य भत्तों की गणना की जाती है। इसलिए फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी का असर कर्मचारियों के कुल वेतन पर दिखाई देगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 25,500 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2 लागू किया जाता है, तो उसकी बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 51,000 रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं 2.5 या 3 फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति में वेतन में इससे अधिक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
HRA की राशि कर्मचारियों के शहर की श्रेणी के आधार पर तय होती है। बड़े शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को अधिक HRA मिलता है, जबकि अन्य शहरों के लिए इसकी दर अलग होती है। नई बेसिक पे तय होने के बाद HRA में भी संशोधन किया जा सकता है।
हालांकि, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही नई वेतन संरचना और भत्तों की तस्वीर साफ होगी।
कर्मचारी संगठनों की ओर से वेतन वृद्धि और भत्तों में सुधार की मांग लगातार उठाई जा रही है। अब सभी की नजरें 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक सिफारिशों पर टिकी हुई हैं।








