नई दिल्ली : सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बड़ा दावा किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,873 ऐसे लोग मौजूद थे, जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि बताई जा रही है। इनमें हत्या, यौन अपराध और नाबालिगों से जुड़े गंभीर मामलों में आरोपी या आरोपित लोग शामिल होने की बात कही गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन लोगों की पहचान चेहरे की पहचान प्रणाली और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद से की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनमें से कितने लोग 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा में शामिल थे। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि क्या इन लोगों की जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसक घटनाओं में कोई भूमिका थी।
बताया गया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुछ लोग प्रदर्शन स्थल पर एक से अधिक बार भी पहुंचे थे। पुलिस अब उनकी गतिविधियों और प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका की जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, चिन्हित लोगों में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे आरोपी भी शामिल हैं।
दरअसल, 20 जुलाई को सीजेपी की ओर से आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और कुछ स्थानों पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
पुलिस के अनुसार, मार्च के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में पुलिस वाहनों समेत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि इस दौरान करीब 163 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल हुए।
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में जांच तेज कर दी है। एक पुलिस निरीक्षक की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों की पहचान की जा रही है। पुलिस अब तकनीकी माध्यमों से चिन्हित किए गए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
हालांकि, पुलिस की ओर से जिन 2,873 लोगों की पहचान किए जाने की बात कही गई है, उनके खिलाफ दर्ज मामलों की प्रकृति और प्रदर्शन के दौरान उनकी वास्तविक भूमिका की जांच अभी जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनमें से कितने लोग हिंसा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे।





