फ्रांस में हिंसा पर ट्रंप का बयान, बोले- सीमाएं बंद करो और आव्रजन पर लगाम लगाओ

0

डेस्क : फ्रांस में महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी मांगों को लेकर शुरू हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों पर हमलों की घटनाएं सामने आईं। राजधानी पेरिस समेत विभिन्न इलाकों में जली हुई गाड़ियों, क्षतिग्रस्त दुकानों और सड़कों पर बिखरे अवरोधकों ने हालात की गंभीरता को उजागर किया। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में जारी हिंसा को आव्रजन से जोड़ते हुए सरकार को सीमाओं पर सख्ती बरतने की सलाह दी है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि फ्रांस जल रहा है और दूसरे देशों से आए लोगों के कारण देश की स्थिति बिगड़ी है। उन्होंने फ्रांस से अपनी सीमाएं बंद करने और आव्रजन पर नियंत्रण करने की अपील की। हालांकि, फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के पीछे अब तक सामने आई प्रमुख मांगें महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी हैं, न कि आव्रजन नीति।

महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं के मुद्दे पर शुरू हुआ प्रदर्शन

फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत छात्रों की ओर से शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग के साथ हुई थी। बाद में ट्रेड यूनियनों और महंगाई से परेशान लोगों ने भी इसमें भाग लेना शुरू कर दिया। देशव्यापी प्रदर्शन बढ़ती कीमतों और आम लोगों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव के विरोध में आयोजित किए गए।

फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इन प्रदर्शनों में करीब 5.50 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि सीजीटी ट्रेड यूनियन ने प्रदर्शनकारियों की संख्या आठ लाख बताई। हालांकि, शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुए मार्च के दौरान कई स्थानों पर हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शन के इतर हुई आगजनी, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी।

पेरिस में रिकॉर्ड गिरफ्तारियां, सुरक्षाकर्मी भी घायल

फ्रांस में हिंसा के बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने के लिए जांच की जा रही है।

पेरिस में पुलिस ने 855 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी, जिसे रिकॉर्ड संख्या बताया गया। शहर की कई सड़कों पर साइकिलों, कूड़ेदानों और अन्य सामान से बनाए गए अवरोधकों के जले हुए अवशेष दिखाई दिए। कई दुकानों के शीशे तोड़ दिए गए और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। नकाबपोश युवाओं द्वारा पेरिस समेत दूसरे शहरों में दुकानों में लूटपाट किए जाने की भी खबरें सामने आईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा के दौरान करीब 500 पुलिसकर्मी, दमकलकर्मी और चिकित्सा आपात सेवाओं से जुड़े कर्मचारी घायल हुए।

जेडी वेंस ने भी आव्रजन नीति पर उठाए सवाल

फ्रांस में हिंसा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी टिप्पणी की। वेंस ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों के उदारवादी नेताओं ने विविधता और सहानुभूति के नाम पर दूसरे क्षेत्रों से लोगों को अपने देशों में बसाया, लेकिन उनके सामाजिक समायोजन और सांस्कृतिक अनुकूलता से जुड़े सवालों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

वेंस ने फ्रांस में हिंसा और ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचने पर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका को भी इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी मतदाताओं को आगाह करते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी की नीतियां अमेरिका को भी ऐसी स्थिति की ओर ले जा सकती हैं।

ट्रंप इससे पहले भी अमेरिका और अन्य देशों में सामाजिक समस्याओं तथा अशांति को आव्रजन से जोड़ते रहे हैं। जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उन्होंने अवैध आव्रजन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इस पर सख्त कार्रवाई का संकल्प लिया था।

हिंसा करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया कि हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों, दुकानों और यहां तक कि नगरपालिकाओं में तोड़फोड़ तथा लूटपाट करने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें सजा दिलाई जाएगी।

फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब देश राष्ट्रपति चुनावों से करीब छह महीने दूर है। इससे सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की आशंका है। यूरो क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस पहले से ही बढ़ते कर्ज और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी आर्थिक दबाव बढ़ाया है।

महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार के सामने प्रदर्शनकारियों की मांगों से निपटने के साथ-साथ हिंसा पर नियंत्रण स्थापित करने और आर्थिक चिंताओं का समाधान करने की चुनौती होगी।