‘द टाइम्स’ की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2022 में पूर्वी सीरिया में हुए इस अभियान के दौरान सैनिकों ने आत्मरक्षा में गोली चलाने की बात कही थी। उनका दावा था कि उन्हें अपनी जान पर गंभीर खतरा महसूस हुआ था। हालांकि, मारे गए दोनों लोगों के पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ था। इस घटना के बाद पांच सैनिकों के खिलाफ हत्या के दो मामलों में जांच शुरू हुई थी। दोषी पाए जाने पर उन्हें उम्रकैद तक की सजा हो सकती थी।
क्या था सीरिया में चलाया गया अभियान?
यह घटना 3 जुलाई 2022 की रात पूर्वी सीरिया के अल-जेर गांव में हुई थी। उस समय इस इलाके में ISIS के लड़ाके कुर्द बलों पर हमले कर रहे थे। ब्रिटेन के आतंकवाद विरोधी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन शेडर’ के तहत SAS की एक टीम को ISIS के एक संदिग्ध सेल लीडर को पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया था। उसकी पहचान गोपनीय कोडनेम ‘ब्रावो वन’ से की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी खुफिया एजेंसियां कई सप्ताह से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। उसे कुर्द बलों पर हुए हमलों में अहम भूमिका निभाने वाला व्यक्ति माना जा रहा था। ब्रिटिश टीम की योजना उसे जिंदा पकड़कर ऐसे कुर्द जेल में भेजने की थी, जिसे ब्रिटेन के विदेश कार्यालय की मंजूरी प्राप्त थी। वहां उससे ISIS की गतिविधियों और पश्चिमी देशों में संभावित आतंकी साजिशों के बारे में पूछताछ की जानी थी।
हालांकि, अभियान के दौरान परिस्थितियां अचानक बदल गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रावो वन और उसके तीन साथी एक ऐसी इमारत से बाहर निकले, जिसे ISIS के हथियारों का ठिकाना माना जा रहा था। इसके बाद वे दूसरी जगह की ओर बढ़ने लगे। SAS के काफिले ने अपना रास्ता बदला और उनके करीब पहुंच गया।
गोलीबारी में दो लोगों की मौत
द टाइम्स के मुताबिक, रात करीब 11 बजकर 41 मिनट पर सैनिक अपने लक्ष्य के नजदीक थे, तभी उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी। सैनिक यह पता नहीं लगा सके कि गोलियां किस दिशा से चलाई जा रही थीं। इस दौरान समूह के दो लोग अंधेरे में भाग गए, जबकि दो अन्य खेत में ही रह गए।
अभियान में शामिल एक सैनिक ने अखबार को बताया कि उस समय कई घटनाएं एक साथ हो रही थीं और उसे पूरा विश्वास था कि उनकी टीम को गंभीर खतरा था। सैनिकों को आशंका थी कि सामने मौजूद दोनों लोग उन पर हमला करने की तैयारी कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, टीम लीडर ने उनका पीछा करने की अनुमति दी। इसके बाद रात करीब 11 बजकर 49 मिनट पर चार सैनिकों ने गोलीबारी की, जिसमें दोनों लोगों की मौत हो गई।
गोलीबारी के बाद सैनिकों ने दोनों के शवों की तलाशी ली, लेकिन न तो उनके पास कोई हथियार मिला और न ही आसपास के क्षेत्र में हथियार बरामद हुए। शुरुआत में कुर्द बलों ने मृतकों में से एक की पहचान ब्रावो वन के रूप में की थी। हालांकि, पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को बाद में कथित तौर पर फेसबुक लाइव का ऐसा वीडियो मिला, जिसमें ब्रावो वन गोलीबारी की घटना के बाद एक स्थानीय चौकी पर हमला करता दिखाई दिया। इससे मृतक की पहचान को लेकर शुरुआती दावे पर सवाल उठे।
कौन थे मारे गए दोनों लोग?
द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मारे गए दोनों लोग किशोर बताए गए थे। हालांकि, उनकी पहचान और ISIS से कथित संबंधों को लेकर पूरी स्पष्टता नहीं है।
मृतकों में एक की पहचान मुहम्मद फतेह खलफ अल-दहम के रूप में की गई, जिसकी उम्र कथित तौर पर 17 वर्ष थी। उसका परिवार अल-जेर गांव का रहने वाला था। रिपोर्ट के अनुसार, मुहम्मद कुछ समय के लिए तुर्किये गया था, लेकिन अपने पिता की अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद वापस लौट आया। सीरिया लौटने पर कुर्द बलों ने उसे हिरासत में लिया था। अप्रैल 2022 में उसे रिहा कर दिया गया था। इसके लगभग तीन महीने बाद उसकी मौत हो गई।
दूसरे मृतक की पहचान अब्दुल्ला के रूप में बताई गई। एक स्थानीय रिपोर्ट में उसकी उम्र 14 वर्ष बताई गई थी, लेकिन अलग-अलग रिपोर्टों में उसके नाम और पहचान को लेकर भिन्न जानकारियां सामने आईं।
द टाइम्स के अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट और स्थानीय दावों में दोनों किशोरों के ISIS से जुड़े होने की बात कही गई थी। कुछ तस्वीरों में मुहम्मद को एके-47 राइफल के साथ और मोटरसाइकिल पर बैठे हुए दिखाए जाने का दावा किया गया, जबकि अब्दुल्ला के बारे में काली पगड़ी पहनने की बात कही गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।
आत्मरक्षा के दावे के बावजूद शुरू हुई हत्या की जांच
घटना की शुरुआती सैन्य समीक्षा में सैनिकों की कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम माना गया था। लेकिन बाद में इंटरनेट पर नागरिकों की मौत से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।
सैनिकों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वे ‘कार्ड अल्फा’ नामक नियमावली का हवाला दे रहे थे, जिसमें कहा गया है कि आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल अंतिम विकल्प होना चाहिए। उनका तर्क था कि उनकी कार्रवाई का आकलन उस समय उपलब्ध जानकारी और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि बाद में सामने आए तथ्यों के आधार पर।
एक सैनिक ने अपनी मानसिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी किसी अनजान नंबर से फोन आता था, तो उसे मामले की चिंता सताने लगती थी।
द टाइम्स के अनुसार, 15 जुलाई 2022 को तत्कालीन विशेष बल निदेशक ग्विन जेनकिंस ने मामले को रॉयल मिलिट्री पुलिस (RMP) के पास भेज दिया। इसके बाद ‘ऑपरेशन टैंगलमेंट’ नाम से आपराधिक जांच शुरू की गई। जांच के दायरे में पांच सैनिक आए। इनमें वह टीम लीडर भी शामिल था, जिसने पीछा करने की अनुमति दी थी, जबकि अन्य चार सैनिकों ने गोलीबारी की थी।
जांच के बीच भी सैन्य अभियानों में लौटे सैनिक
हत्या के मामले में जांच का सामना करने के बावजूद पांचों सैनिकों को सक्रिय सैन्य ड्यूटी पर वापस भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2022 में पूछताछ के 48 घंटे के भीतर वे फिर सीरिया लौट गए। इसके बाद उन्होंने दुश्मन के कब्जे वाले इलाकों में कई जोखिम भरे अभियानों में हिस्सा लिया। इन अभियानों में ISIS के संदिग्धों की गिरफ्तारी और उन्हें वहां से निकालने की कार्रवाई भी शामिल थी।
एक सैनिक ने अखबार को बताया कि वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कारणों से छुट्टी ले सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उसके मुताबिक, कहीं भी अभियान पर न जाने का विचार उसे और अधिक मानसिक तनाव में डाल सकता था।
इस बीच, पुलिस की जांच जारी रही। सितंबर 2023 में पांचों सैनिकों को बताया गया कि रॉयल मिलिट्री पुलिस उनके खिलाफ आरोप तय करने की मांग कर रही है और मामला सैन्य अभियोजन प्राधिकरण (Service Prosecuting Authority) को भेज दिया गया है। यह संस्था ब्रिटेन की सैन्य न्याय व्यवस्था में अभियोजन का काम करती है।
मई 2025 में आरोप नहीं चलाने का फैसला
करीब तीन साल तक चली जांच के बाद 30 मई 2025 को पांचों सैनिकों को सूचित किया गया कि उनके खिलाफ आरोप नहीं चलाए जाएंगे। द टाइम्स के मुताबिक, उन्हें भेजे गए नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया था कि नए सबूत मिलने, कोई नया आरोप सामने आने या फैसले की समीक्षा के लिए उचित अनुरोध किए जाने की स्थिति में निर्णय बदला जा सकता है।
इस तरह सैनिकों को तत्काल कानूनी राहत तो मिली, लेकिन मामले पर पूरी तरह विराम नहीं लगा। अभियोजन नहीं चलाने का फैसला अपने आप में यह प्रमाणित नहीं करता कि गोलीबारी के दौरान सैनिकों की हर कार्रवाई सही थी।
यह मामला युद्धक्षेत्र में आत्मरक्षा, सैन्य नियमों के पालन और संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान नागरिकों की मौत की जांच जैसे गंभीर सवालों को सामने लाता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करता है कि सैन्य अभियानों में लिए गए फैसलों की कानूनी जांच लंबे समय तक संबंधित सैनिकों के पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर सकती है।









