गेल गैस शेयर बाजार में उतरने को तैयार, २५ प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी

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डेस्क : सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख प्राकृतिक गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी गेल गैस लिमिटेड को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी के निदेशक मंडल ने गेल गैस का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत गेल अपनी सहायक कंपनी की अधिकतम २५ प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है।

कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में लिए गए इस फैसले को गेल समूह के कारोबार विस्तार और निवेश के नए अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी आईपीओ की तारीख, निर्गम मूल्य और अन्य शर्तों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

२००८ में हुई थी गेल गैस की स्थापना

गेल गैस लिमिटेड की स्थापना वर्ष २००८ में हुई थी। कंपनी का मुख्य उद्देश्य देश में नगर गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार करना है। वर्तमान में कंपनी नौ राज्यों के १६ भौगोलिक क्षेत्रों में गैस वितरण परियोजनाएं संचालित कर रही है। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, गोवा और असम में भी कंपनी की व्यावसायिक गतिविधियां हैं।

छह नए क्षेत्रों में होगा कारोबार का विस्तार

गेल के निदेशक मंडल ने गेल गैस को छह नए नगर गैस वितरण क्षेत्रों का कारोबार सौंपने की भी मंजूरी दी है। इनमें वाराणसी, पटना, रांची, पूर्वी सिंहभूम, कटक और खुर्दा शामिल हैं। इन क्षेत्रों का हस्तांतरण व्यावसायिक समझौते के तहत किया जाएगा। इसके लिए पहली जनवरी २०२७ की तारीख निर्धारित की गई है।

दूसरी तिमाही में मुनाफे में १३९ प्रतिशत की वृद्धि

गेल ने वित्त वर्ष २०२६-२७ की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा बढ़कर ४,७१९.६६ करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह १,९७२.४० करोड़ रुपये था। इस प्रकार कंपनी के मुनाफे में सालाना आधार पर १३९.३ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, कंपनी का समेकित परिचालन राजस्व भी बढ़कर ४७,३०१.०३ करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ३५,६५७.२३ करोड़ रुपये था। इस तरह राजस्व में भी ३२.७ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

निवेशकों की नजर आईपीओ पर

गेल गैस के प्रस्तावित आईपीओ को कंपनी के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कंपनी को अपनी बाजार उपस्थिति बढ़ाने और भविष्य की विस्तार योजनाओं को गति देने का अवसर मिल सकता है। अब निवेशकों की नजर आईपीओ से जुड़ी आगामी घोषणाओं, निर्गम की तारीख और मूल्य निर्धारण पर रहेगी।