ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को 1.86 लाख करोड़ की मंजूरी, छह रबी फसलों की एमएसपी बढ़ी

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डेस्क : केंद्र सरकार ने देश में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और किसानों को राहत देने के लिए बुधवार को कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 1.86 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर’ योजना को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही आगामी रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं समेत छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि का फैसला किया गया है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को लाभ मिलेगा। किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए 41,533 करोड़ रुपये की सब्सिडी को भी मंजूरी दी गई है।

135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण का लक्ष्य

सरकार के अनुसार, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके माध्यम से करीब 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने और उसकी निकासी की क्षमता विकसित की जाएगी। योजना का उद्देश्य देश में बढ़ती हरित ऊर्जा क्षमता को मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क उपलब्ध कराना है।

छह रबी फसलों की एमएसपी बढ़ी

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नई दरों के अनुसार, 2027-28 के लिए गेहूं का एमएसपी 2,585 रुपये से बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसी तरह जौ का एमएसपी 2,150 रुपये से बढ़कर 2,286 रुपये, चने का 5,875 रुपये से बढ़कर 5,958 रुपये और मसूर का 7,000 रुपये से बढ़कर 7,390 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

सरसों का एमएसपी 6,200 रुपये से बढ़ाकर 6,613 रुपये तथा कुसुम का एमएसपी 6,540 रुपये से बढ़ाकर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।

कुसुम के एमएसपी में सबसे अधिक बढ़ोतरी

एमएसपी में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि कुसुम के भाव में की गई है। इसके बाद सरसों के एमएसपी में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चने में 83 रुपये और गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आगामी रबी सत्र में एमएसपी व्यवस्था के तहत किसानों तक करीब 90,962 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि एमएसपी में यह बढ़ोतरी किसानों को उनकी उपज का बेहतर पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।